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औरंगाबाद के पूर्व भाजपा सांसद का बड़ा आरोप: बटाने नदी पुल निर्माण में घोर अनियमितता, मुख्य सचिव को लिखा पत्र

औरंगाबाद के पूर्व भाजपा सांसद का बड़ा आरोप: बटाने नदी पुल नि

Aurangabad : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने राष्ट्रीय राजमार्ग-139 (NH-139) पर बने बटाने नदी पुल के दोबारा क्षतिग्रस्त होने को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इस निर्माण कार्य में घोर अनियमितता और भ्रष्टाचार का संगीन आरोप लगाया है। पूर्व सांसद ने इस गंभीर मामले को लेकर बिहार सरकार के मुख्य सचिव और पथ निर्माण विभाग के सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए जांच की मांग की है।


कुछ ही वर्षों में दोबारा जर्जर हुआ करोड़ों की लागत से बना पुल

पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने अपने पत्र के माध्यम से कहा कि औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत एनएच-139 पर बटाने नदी पर इस पुल का निर्माण कुछ ही वर्ष पहले कराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत से ही इस पुल के निर्माण में गुणवत्ता की भारी अनदेखी की गई थी, जिसके कारण उद्घाटन के कुछ समय बाद ही इसमें तकनीकी खामियां आने लगी थीं। निर्माण में बरती गई इसी लापरवाही की वजह से पुल असमय जर्जर होकर आज बेहद खतरनाक और दयनीय स्थिति में पहुंच गया है।


मरम्मत के नाम पर सरकार के करोड़ों रुपये हुए बर्बाद

पत्र में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि पूर्व में जब यह पुल पहली बार क्षतिग्रस्त हुआ था, तब जनहित और यातायात को ध्यान में रखते हुए इसके ऊपरी हिस्से की विशेष मरम्मती (रिपेयरिंग) कराई गई थी। उस दौरान भी पुल से आवागमन रोककर एक अस्थाई डायवर्शन बनाया गया था। पूर्व सांसद ने कहा कि इस मरम्मत कार्य पर सरकार के कई करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए, जो पूरी तरह से अनावश्यक थे और निर्माण एजेंसी की गलती का खामियाजा सरकारी खजाने को भुगतना पड़ा, लेकिन मजबूरी में ऐसा करना पड़ा था।


आसन्न खतरे को देख प्रशासन ने परिचालन पर लगाई रोक

वर्तमान स्थिति का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि मरम्मत के बावजूद यह पुल एक बार फिर से क्षतिग्रस्त हो गया है और कभी भी गिर सकता है। आसन्न खतरे और जन-धन की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इस पुल से वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया है ताकि कोई बड़ी दुर्घटना न हो सके। फिलहाल, मजबूरी में यातायात को एक वैकल्पिक (रूट डाइवर्ट) रास्ते से शुरू किया गया है, जो काफी लंबी दूरी का है और आम जनता के लिए बेहद कष्टकारी साबित हो रहा है।


समय और ईंधन बचाने के लिए 'लो लेवल ब्रिज' बनाने का सुझाव

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पूर्व सांसद ने मुख्य सचिव को सुझाव दिया है कि क्षतिग्रस्त पुल की विशेष मरम्मती या नए सिरे से पुल निर्माण की प्रक्रिया में एक लंबा समय लगेगा। तब तक जनता की परेशानी को दूर करने के लिए सरकार को पुल के ठीक बगल में अविलंब एक 'लो लेवल ब्रिज' (Low Level Bridge) या बेहद मजबूत पक्के डायवर्शन का निर्माण कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ईंधन बेहद महंगा है, इसलिए जनहित में लोगों के समय और पैसे की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार को तुरंत यह आवश्यक कदम उठाना चाहिए।

दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट