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Bihar News : औरंगाबाद में कोर्ट के फैसले से 'कुंवारी मां' को मिला सुहाग, 9 माह की मासूम बेटी बनी अपने माता-पिता की शादी की गवाह

Bihar News : औरंगाबाद में कोर्ट के अहम फैसले से कुंवारी मां को उसका सुहाग मिल गया. फैसले के बाद दोनों की मंदिर में शादी करायी गयी........पढ़िए आगे

Bihar News : औरंगाबाद में कोर्ट के फैसले से 'कुंवारी मां' को
'कुंवारी मां' को मिला सुहाग- फोटो : DINANATH

AURANGABAD : बिहार के औरंगाबाद जिले से कानूनी पेचीदगियों के बीच मानवता और प्रेम की जीत की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। लगभग डेढ़ साल पहले शुरू हुआ एक प्रेम प्रसंग, जो अपहरण के आरोप और जेल की सलाखों तक जा पहुँचा था, उसका अंत आज कोर्ट परिसर स्थित मंदिर में शहनाइयों के साथ हुआ। खास बात यह रही कि इस शादी की सबसे बड़ी गवाह दोनों की नौ महीने की मासूम बेटी बनी, जिसे गोद में लेकर इस प्रेमी जोड़े ने सात फेरे लिए और समाज के कथित 'दाग' को धो डाला।

मामले की शुरुआत तब हुई थी जब परिजनों ने युवक पर नाबालिग लड़की को भगा ले जाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। दिल्ली से बरामदगी के बाद पुलिस ने युवक को पॉक्सो एक्ट के तहत जेल भेज दिया और लड़की को परिजनों के हवाले कर दिया। इसी बीच मामले में नया मोड़ तब आया जब लड़की गर्भवती पाई गई। सामाजिक लोक-लाज की परवाह किए बिना युवती ने बच्चे को जन्म देने का साहसी फैसला किया। इस दौरान वह बालिग भी हो गई, लेकिन उसका प्रेमी जेल में ही बंद रहा।

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बेटी के जन्म के बाद 'कुंवारी मां' के रूप में जीवन जी रही युवती ने अपनी संतान को पिता का नाम दिलाने के लिए कानूनी संघर्ष शुरू किया। उसने अदालत से गुहार लगाई कि उसके प्रेमी को जमानत दी जाए ताकि वे शादी कर सकें और अपनी बेटी को एक सुरक्षित भविष्य दे सकें। युवती की दलील थी कि शादी ही उनके और उनकी बच्ची के जीवन को सामाजिक सम्मान दिला सकती है। इस भावुक अपील ने मामले को एक नया मानवीय दृष्टिकोण प्रदान किया।

स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए एक ऐतिहासिक रुख अख्तियार किया। अदालत ने शर्त रखी कि यदि दोनों पक्ष शादी करने और बच्ची को खुशी-खुशी रखने का लिखित एकरारनामा (Affidavit) कोर्ट में पेश करते हैं, तो युवक को जमानत दे दी जाएगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद दोनों परिवारों ने आपसी सहमति से दस्तावेज जमा किए, जिसके बाद लगभग आठ महीने से जेल में बंद युवक की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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रिहाई के तुरंत बाद, कोर्ट परिसर स्थित महावीर मंदिर में अधिवक्ताओं और परिजनों की मौजूदगी में दोनों का विवाह संपन्न हुआ। मंदिर के प्रांगण में जब नौ महीने की मासूम अपनी मां की गोद में बैठकर माता-पिता की शादी देख रही थी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। अधिवक्ता नरेंद्र सिंह और दोनों पक्षों के अभिभावकों ने इस मिलन का गवाह बनकर नवदंपति को आशीर्वाद दिया। शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन अपनी नन्हीं परी को लेकर एक नई जिंदगी की शुरुआत के लिए रवाना हो गए।

दीनानाथ की रिपोर्ट