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Bihar News : आरा में सरकारी 'बुलडोजर' ने छीनी गरीबों की छत, महादलित बस्ती में मची चीख-पुकार, बेघर हुए दर्जनों परिवार

Bihar News : आरा में सरकारी बुलडोजर ने कई दर्जन महादलित परिवारों का घर छीन लिया है. इससे कई परिवार बेघर हो गये......पढ़िए आगे

Bihar News : आरा में सरकारी 'बुलडोजर' ने छीनी गरीबों की छत,
महादलित परिवार हुए बेघर - फोटो : SOCIAL MEDIA

ARA : बिहार में जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच भोजपुर जिले के आरा नगर निगम क्षेत्र से एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। यहाँ की एक दलित बस्ती में प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर दर्जनों परिवारों के घरों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान स्थिति तब और भावुक हो गई जब लोग अपनी आंखों के सामने बरसों से बनाए आशियानों को मलबे में तब्दील होते देखते रहे। कड़ाके की ठंड के बीच हुई इस कार्रवाई ने कई गरीब परिवारों को बेघर कर दिया है, जो अब अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ सड़क पर रात गुजारने को मजबूर हैं।

पीड़ित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें घर खाली करने या अतिक्रमण हटाने की कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी। अचानक पहुंचे बुलडोजर ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, वे यहाँ कई पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनके पास इस पते के बिजली-पानी के बिल, आधार कार्ड और वोटर लिस्ट जैसे तमाम सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। बिना किसी मोहलत के हुई इस कार्रवाई से बस्ती के लोगों में जिला प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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पीड़ितों की व्यथा बताते हुए एक निवासी धनजी राम ने रोते हुए कहा कि उन्होंने मई के महीने में अपनी बेटी की शादी तय कर रखी थी। अब जब सिर पर छत ही नहीं रही, तो वे शादी कहाँ से और कैसे करेंगे? उन्होंने बताया कि बुलडोजर की अचानक हुई कार्रवाई में मिट्टी के मकानों के साथ-साथ घर के अंदर रखा कीमती सामान और शादी के लिए जुटाए गए बर्तन व अन्य सामग्रियां भी मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह गरीब महादलित परिवार अपने आशियाने को बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासन की मशीनों ने उनकी एक न सुनी। बेघर हुए लोगों के पास अब रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। ठंड के इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के साथ सड़क किनारे बैठे ये लोग अब सरकार से मदद और पुनर्वास की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर वे अवैध रूप से बसे थे, तो उन्हें कम से कम अपना सामान निकालने का समय तो दिया जाना चाहिए था। 

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इस मामले ने अब तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और अतिक्रमण के नाम पर गरीबों को इस तरह उजाड़ना मानवता के खिलाफ है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है कि इन विस्थापित परिवारों के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी। पूरी बस्ती में अब सन्नाटा और मायूसी पसरी हुई है। 

आशीष की रिपोर्ट