First Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार, इस दिन से पटरी पर पकड़ेगी रफ्तार, जानिए किराया और रुट

First Hydrogen Train: भारत की पहली हाईड्रोजन ट्रेन जल्द ही दौड़ती दिखेगी। हाईड्रोजन ट्रेन का रुट और किराया भी तय हो गया है। हाईड्रोजन ट्रेन जीरो नाइस और जीरो पॉल्यूशन वाली अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन है।

हाइड्रोजन ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेन तैयार - फोटो : social media

First Hydrogen Train:  भारतीय रेलवे नया इतिहास रचने को तैयार है। देश की पहली और दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन अब पटरी पर दौड़ने को तैयारी है। हाइड्रोजन ट्रेन जीरो नाइस और जीरो पॉल्यूशन वाली अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन है। पहला हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत सेक्सन के बीच 140 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेगी। प्रतिदिन यह ट्रेन दो फेरे लगाते हुए कुल 356 किमी की दूरी तय करेगी। ट्रेन में 2600 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे। 

काम लागत में सफर 

जानकारी अनुसार ट्रेन का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई में हुआ है। सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्देश्य डीजल और सीएनजी के विकल्प के रूप में कम लागत और पर्यावरण अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन को बढ़ावा देना है। फिलहाल सोनीपत–जींद रूट पर सीएनजी ट्रेन का संचालन हो रहा है।

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यात्रियों को मिलेगा विमान जैसा अनुभव

हाइड्रोजन ट्रेन के कोच आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इनमें तापमान सेंसर, आधुनिक बायो टॉयलेट, वॉशबेसिन, नीले रंग के आरामदायक गद्दे, एलईडी लाइट पैनल और छत पर आधुनिक पंखे लगाए गए हैं। खड़े यात्रियों के लिए मजबूत नीले रंग के हैंडग्रिप्स दिए गए हैं। ट्रेन में बीच-बीच में स्लाइडिंग दरवाजे, मेटालिक शीट वाला फर्श, दरवाजों के पास स्टील रेलिंग और ग्रिल्स भी लगाए गए हैं। ट्रेन को गहरे नीले और सफेद रंग के संयोजन में रंगा गया है। इसके अगले हिस्से पर “H2 Powered – Clean Mobility” लिखा गया है।

लोको पायलट के लिए हाईटेक कैबिन

लोको पायलट के केबिन में डिजिटल स्क्रीन लगी है जो हाइड्रोजन स्तर और ट्रेन की गति की सटीक जानकारी देती है। पुश-बटन ऑटोमैटिक ब्रेकर पैनल, रेड इमरजेंसी हैंडल और पुश-बटन कंट्रोलर लगाए गए हैं। इलेक्ट्रिक सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए स्विच और सर्किट ब्रेकर की भी व्यवस्था की गई है।

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किराया और स्टॉपेज

अनुमान है कि जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन के चार से पांच स्टॉपेज होंगे। किराया 5 से 25 रुपये के बीच हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। ट्रेन के संचालन की तारीख भी फिलहाल घोषित नहीं की गई है। भारतीय रेलवे की यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, बल्कि भविष्य के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन का मजबूत मॉडल भी पेश करेगी।