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Supreme Court SIR Verdict: SIR पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, वोटर लिस्ट शुद्धिकरण वैध है ,चुनाव आयोग को मिली अभूतपूर्व संवैधानिक ताकत, 19 राज्यों में तेज होगा वोटर रिवीजन

Supreme Court SIR Verdict: देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को पूरी तरह वैध और संवैधानिक करार दे दिया है।...

Supreme Court Upholds SIR Strengthens Election Commission Po
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- फोटो : social Media

Supreme Court SIR Verdict: देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को पूरी तरह वैध और संवैधानिक करार दे दिया है। इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की खुली छूट मिल गई है, जिससे आने वाले समय में 19 राज्यों में इस प्रक्रिया के तेज होने की संभावना है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष व शुद्ध मतदाता सूची तैयार करने का पूरा अधिकार प्राप्त है। अदालत ने यह भी माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग और गहन प्रक्रिया अपनाना संविधान के दायरे में ही आता है।

इस ऐतिहासिक फैसले को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने साफ कहा कि फर्जी वोटिंग, डुप्लीकेट नाम और मृत मतदाताओं को हटाने के लिए SIR जैसी प्रक्रिया जरूरी है। अदालत के अनुसार, साफ और अपडेटेड वोटर लिस्ट ही निष्पक्ष चुनाव की असली बुनियाद है।

इस फैसले के बाद चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है और अब देश के कई राज्यों में बूथ स्तर पर घर-घर सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट की प्रक्रिया तेज की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चुनावी पारदर्शिता बढ़ेगी और मतदान व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।

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यह मामला बिहार में SIR प्रक्रिया के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा था, जहां याचिकाकर्ताओं ने इसे चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि यह प्रक्रिया सामान्य संशोधन से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों पर असर डाल सकती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार में SIR के बाद मतदाता संख्या में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कुल संख्या 7.42 करोड़ रह गई। इस दौरान 69.29 लाख नाम हटाए गए, जबकि 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लाखों नाम मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट पाए गए। 

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को “चुनावी सुधारों का टर्निंग पॉइंट” माना जा रहा है। आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इसका सीधा और बड़ा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि अब मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया और अधिक सख्त व व्यापक होने जा रही है।