किसके आदेश से चला पैलेट गन ! CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिया बड़ा आदेश

मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल जांच कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। यदि किसी अधिकारी की गलती साबित होती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

Supreme Court on  police brutalities
Supreme Court on police brutalities - फोटो : news4nation

Supreme Court :  NEET छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मामले की पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की ओर से सीमा से अधिक बल प्रयोग या अन्य प्रकार की ज्यादती सामने आती है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।


मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल जांच कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। यदि किसी अधिकारी की गलती साबित होती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की, "अगर जिम्मेदारी तय नहीं होती, तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता।"

Diarch GO


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक अधिकारों के दायरे में था। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के बीच कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो गए, जिनका आंदोलन से कोई संबंध नहीं था और जिन्होंने स्थिति को प्रभावित किया।


वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस ने निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि बल प्रयोग से पहले पुलिस को लाउडस्पीकर के जरिए चेतावनी देनी चाहिए थी। इसके बाद भी कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से होनी चाहिए थी। उन्होंने तर्क दिया कि लाठीचार्ज में कमर के नीचे वार किया जाना चाहिए और आंसू गैस जैसे उपाय बाद के चरण में अपनाए जाने चाहिए।

NSIT
Nsmch


याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि एक सहायक उपनिरीक्षक (ASI) ने स्वयं एक कार के शीशे तोड़े, जिसका वीडियो भी मौजूद है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों तक जवाबदेही तय नहीं की गई, तो पुलिसकर्मियों में दंड से बच निकलने की भावना बढ़ेगी।


सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है और यदि किसी स्तर पर पुलिस की ओर से ज्यादती हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।