शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज दे सकते हैं इस्तीफा! CJP के दावे से दिल्ली की सियासत में हलचल, हालाकि अभी तक रिजाइन करने का भाजपा का नहीं रहा है इतिहास

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की काकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है

Dharmendra Pradhan Resignation
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज दे सकते हैं इस्तीफा!- फोटो : social Media

Paper Leak Controversy: पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली की सियासत में घमासान मचा हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, वहीं सत्ता पक्ष पूरे मामले पर सफाई देने में जुटा है। इसी बीच काकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा कर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है कि सूत्रों के हवाले से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज अपना इस्तीफा दे सकते हैं। 

 काकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि शिक्षा मंत्री आज़ दे सकते हैं इस्तीफा - सूत्र।

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CJP के इस दावे के बाद सियासी तापमान बढ़ गया है।उधर  पार्टी और केंद्र सरकार के बीच हुई अहम बैठक ने भी चर्चाओं को हवा दे दी है। शुक्रवार को  दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के पास वीपी हाउस में हुई इस बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि CJP की तरफ से आशुतोष राका और सौरव दास ने मोर्चा संभाला।करीब 45 मिनट तक चली इस मुलाकात में CJP ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। बताया गया कि केंद्र सरकार ने इन मांगों पर विचार के लिए शनिवार दोपहर तक का वक्त मांगा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार की तरफ से क्या सियासी फैसला सामने आता है।

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उधर, नीट पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करेगा।

राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। उन्होंने एक घायल युवक के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए।

पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल बता रहा है, जबकि सरकार सख्त कानून और कार्रवाई का भरोसा दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक सियासी संग्राम का केंद्र बना रह सकता है।

रिपोर्ट- गगन राज