लोकसभा सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कांग्रेस का विरोध, संसद सत्र बुलाने के समय पर भी उठाए सवाल

चिदंबरम ने कहा कि इस समय देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है।

Increase Lok Sabha seats
Increase Lok Sabha seats- फोटो : news4nation

Increase Lok Sabha seats :  कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद पी. चिदंबरम ने लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इससे निचला सदन “बेहद बड़ा और बोझिल” हो जाएगा, जहां सांसदों को बोलने के लिए पर्याप्त समय और अवसर नहीं मिल पाएंगे। रविवार को जारी बयान में चिदंबरम ने कहा कि इतनी बड़ी लोकसभा में हर सदस्य की भूमिका सीमित हो जाएगी। 


उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी सांसद को तीन महीने में एक बार ही कुछ मिनट बोलने का मौका मिलेगा, तो वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी ढंग से कैसे उठा पाएगा। उन्होंने 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई। इस दौरान डिलिमिटेशन को मंजूरी देने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल लाने की बात कही जा रही है। चिदंबरम ने इसे “शरारतपूर्ण कदम” बताते हुए कहा कि इसका विरोध किया जाना चाहिए।

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चिदंबरम ने कहा कि इस समय देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इन राज्यों के कुल 67 सांसद विपक्ष की बेंच पर हैं और वे चुनाव प्रचार में व्यस्त रहेंगे। ऐसे में यदि इन तारीखों पर संसद सत्र बुलाया जाता है, तो वे चर्चा और मतदान में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। 


उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव प्रक्रिया 29 अप्रैल तक पूरी हो जाएगी, तो संसद सत्र उसी के बाद क्यों नहीं बुलाया जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि यह कदम विपक्षी सांसदों को चर्चा से दूर रखने की योजना हो सकती है। लोकसभा सीटों के विस्तार के प्रस्ताव पर चिदंबरम ने कहा कि इससे ज्यादा आबादी वाले राज्यों और दक्षिण भारत के उन राज्यों के बीच असंतुलन बढ़ेगा, जहां जनसंख्या स्थिर हो चुकी है।

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महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों में से ही एक-तिहाई सीटें आरक्षित कर इस प्रावधान को लागू किया जा सकता है, इसके लिए लोकसभा का आकार बढ़ाने की जरूरत नहीं है।