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अन्ना हजारे 5 जुलाई से करेंगे अनशन, भाजपा सरकार के इस फैसले का कर रहे विरोध, जान देने तक की चेतावनी

अपने पत्र में अन्ना हजारे ने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि 12 जून के संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो मैं 5 जुलाई से यादव बाबा मन्दिर में आमरण अनशन शुरू करूंगा, चाहे इसकी कीमत मेरी जान ही क्यों न हो।"

Anna Hazare Hunger Strike
Anna Hazare Hunger Strike - फोटो : news4nation

Anna Hazare :  सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि महाराष्ट्र सरकार सूचना का अधिकार (आरटीआई) नियमों में किए गए "अवैध" संशोधनों को तत्काल वापस नहीं लेती है, तो वह 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। हजारे ने आरोप लगाया कि 12 जून को किए गए संशोधन Right to Information Act, 2005 की मूल भावना के खिलाफ हैं और पारदर्शिता को कमजोर करते हैं। उन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को लिखे पत्र में कहा कि महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026, आरटीआई कानून की धार को कुंद कर देंगे और आम लोगों को सूचना प्राप्त करने से दूर कर देंगे।

हजारे ने आरटीआई आवेदन शुल्क में बढ़ोतरी का भी विरोध किया। उनका कहना है कि सरकार ने इसके पीछे कोई तार्किक कारण या वित्तीय विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया है। उन्होंने पत्र में लिखा, "आरटीआई कोई राजस्व जुटाने वाला कानून नहीं है। यदि 20 वर्षों बाद शुल्क बढ़ाया जा रहा है, तो सूचना देने से इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाले जुर्माने में भी वृद्धि की जानी चाहिए।" 

उन्होंने आवेदकों के लिए पहचान पत्र (आईडी) अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया। हजारे के अनुसार, आरटीआई अधिनियम की धारा 6(2) के तहत आवेदकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि ऐसी शर्त व्हिसलब्लोअर और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। हजारे ने "एक विषय, एक आवेदन" नियम की भी आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक और बोझिल बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार किए गए आवेदनों को सीधे बंद करने का प्रावधान लोगों को पूरी या अद्यतन जानकारी प्राप्त करने से वंचित कर सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम व्यवस्था की कमियों को दूर करने के बजाय नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। हजारे ने उल्लेख किया कि आरटीआई अधिनियम की धारा 4, जो सरकारी विभागों को स्वतः सूचना सार्वजनिक करने का निर्देश देती है, अभी भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही है। इसी कारण लोगों को सूचना पाने के लिए आवेदन दाखिल करने पड़ते हैं। हजारे ने आरोप लगाया कि इन संशोधनों को बिना किसी सार्वजनिक परामर्श के लागू किया गया है। उन्होंने कहा, "प्रक्रिया को अधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासन-केंद्रित बनाने से पारदर्शिता कम होगी।"

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अपने पत्र में हजारे ने चेतावनी देते हुए कहा, "यदि 12 जून के संशोधनों को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो मैं 5 जुलाई से यादव बाबा मन्दिर में आमरण अनशन शुरू करूंगा, चाहे इसकी कीमत मेरी जान ही क्यों न हो।" उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह नए नियमों को वापस ले और आवेदकों पर नई पाबंदियां लगाने के बजाय सरकारी विभागों द्वारा स्वप्रेरित सूचना प्रकटीकरण की व्यवस्था को मजबूत करे।