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तेजस्वी ने झूठ नहीं कहा ! हर पैमाने पर केरल से पीछे है बिहार, आय हो या अपराध, शिक्षा हो या स्वास्थ्य सबमें फिसड्डी

तेजस्वी के बयान से बिहार में बड़ा बवाल मचा हुआ है कि केरल की तुलना क्या बिहार सच पीछे हैं. भले ही इसे लेकर सियासी बयानबाजी हो रही है लेकिन तेजस्वी यादव ने झूठ भी नहीं बोला है, देखिए आंकड़े -

Bihar lags behind Kerala on every scale
Bihar lags behind Kerala on every scale- फोटो : news4nation

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के केरल दौरे के दौरान दिए गए एक बयान ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए केरल पहुंचे तेजस्वी यादव ने बिहार को देश का सबसे गरीब राज्य बताते हुए केरल के विकास मॉडल की खुलकर तारीफ की। उनके इस बयान के बाद एनडीए नेताओं ने इसे 'बिहार का अपमान' करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

तेजस्वी यादव के इस बयान ने एक बार फिर देश के दो राज्यों बिहार और केरल के विकास मॉडल की तुलना को केंद्र में ला दिया है। आंकड़े बताते हैं कि कई प्रमुख मानकों पर बिहार, केरल से काफी पीछे है। चाहे केंद्र के नीति आयोग के आंकड़े हों या दोनों राज्यों के बीच विकास की तुलना हर मामले में केरल ने बिहार को पीछे छोड़ रखा है। 

आय और अर्थव्यवस्था में बड़ा अंतर

केरल की प्रति व्यक्ति आय करीब ₹2.3–2.5 लाख सालाना है। वहीं बिहार की प्रति व्यक्ति आय केवल ₹60–70 हजार के आसपास है। देश के सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले राज्य में बिहार है। यानी केरल का एक आम नागरिक, बिहार के मुकाबले लगभग 3–4 गुना अधिक कमाता है। वित्त वर्ष 2025-26/2026-27 के आसपास के आंकड़ों के अनुसार बिहार का कुल बजट लगभग ₹3.47 लाख करोड़ है जबकि व्यय (2025-26 अनुमान) ₹2.94 लाख करोड़ का रहा। वहीं केरल का कुल बजट (व्यय) लगभग ₹1.98 लाख करोड़ रहा जबकि कुल बजट आकार (अनुमानित) करीब ₹2 लाख करोड़ रहा। ऐसे में बिहार का बजट आकार बड़ा है, लेकिन यह उसकी बड़ी आबादी (12-13 करोड़) के कारण है। प्रति व्यक्ति खर्च के मामले में केरल (आबादी 3.5 करोड़) आगे है।


केंद्र पर निर्भर है बिहार

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर केरल जहां सेवा और उद्योग आधारित है वहीं बिहार कृषि आधारित है और अपनी ज्यादातर जरूरतों के लिए केंद्र के अनुदान पर निर्भर है। 14वें वित्त आयोग के आंकड़े बताते हैं कि केंद्रीय टैक्स में हिस्सा के मामले में बिहार को 9.665% का लाभ मिलता है जबकि केरल को सिर्फ 2.5% मिलता है। केंद्रीय टैक्स पूल में बिहार को केंद्र सरकार से लगभग 4 गुना ज्यादा हिस्सा मिलता है। 

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शिक्षा में भी पीछे बिहार

आंकड़े बताते हैं केरल की साक्षरता दर 95% के करीब है। वहीं बिहार में साक्षरता दर लगभग 70% के आसपास है। इतना ही नहीं केरल में उच्च शिक्षा में Gross Enrolment Ratio (GER) लगभग 40–41% है, वहीं बिहार में GER केवल 25–26% के आसपास है। केरल जहां कॉलेज और यूनिवर्सिटी की बेहतर उपलब्धता के लिए देश भर में जाना जाता है वहीं बिहार कुछ सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों के अलावा कॉलेजों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में कम है। यहां तक कि प्लेसमेंट के मामले में भी बिहार से कहीं आगे केरल के संस्थान हैं। केरल में हर 100 में से करीब 40 युवा उच्च शिक्षा में जाते हैं, जबकि बिहार में यह संख्या केवल 25 के आसपास है।

स्वास्थ्य में केरल का दबदबा

स्वास्थ्य सेवाओं और मानव विकास सूचकांक (HDI) में भी केरल देश के शीर्ष राज्यों में है, जबकि बिहार निचले पायदान पर बना हुआ है। पिछले वर्षों में केंद्र और बिहार सरकार के प्रयासों से बिहार में कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का कायाकल्प हुआ है। लेकिन इसके बाद भी अपनी सर्वाधिक आबादी के कारण बिहार जहां स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़े राज्यों में शामिल है वहीं केरल शीर्ष पायदान पर है। इतना ही नहीं केरल देश में सर्वाधिक संख्या में कुशल नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ देने वाले राज्य के रूप में जाना जाता है, जहां से प्रति वर्ष हजारों की संख्या में विदेशों में नर्स सेवा देने जाते हैं। 

पलायन, निवेश और औद्योगिक विकास

केरल में बाहरी प्रवास (Gulf देशों में नौकरी) बड़े स्तर पर है। लेकिन केरल में भी अन्य राज्यों के मजदूर आते हैं और बड़े स्तर पर यहां के आतिथ्य, सेवा और उद्योगों में नौकरी करते हैं। वहीं बिहार में पलायन राज्य की सबसे बड़ी समस्या है। बिहार से केवल जाने वाले यानी केवल outward migration है जबकि केरल में inward + outward migration दोनों है। इसी तरह निवेश के मामले में केरल में आईटी, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में भारी निवेश हो रहा है, वहीं बिहार में कम औद्योगिकीकरण और निवेश का अभाव है जो नीति आयोग की रिपोर्ट में दर्शाया गया है।  

अपराध दर में चौंकाता है केरल

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रति लाख आबादी पर कुल अपराध दर राष्ट्रीय औसत  450–460 प्रति लाख है। वहीं केरल में प्रति लाख आबादी पर 1600+ मामले हैं जो देश में सबसे अधिक crime rate वाले राज्यों में एक है। वहीं बिहार में लगभग 220–230 मामले प्रति लाख आबादी के बीच है। हालांकि जानकारों का मानना है कि बिहार में कम मामले दर्ज होने का एक कारण बेहतर FIR दर्ज करने की संस्कृति का नहीं होना है जबकि केरल में पीपुल फ्रेंडली पुलिसिंग ज्यादा है। जैसे NCRB 2023 के अनुसार बिहार देश में हत्या के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल है जबकि केरल में बेहद कम हत्या हुई। ऐसे में जघन्य और गंभीर अपराध में बिहार आगे है लेकिन प्रति लाख पर अपराध दर कम है जिसका एक कारण बिहार की बड़ी आबादी भी है।