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अमेरिका–इस्राइल के संयुक्त हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर खामेनेई,बेटी-दामाद, पोती-बहू भी मारी गईं, तेहरान में सत्ता परिवर्तन , नए कमांडर-इन-चीफ बने अहमद वाहिदी

US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया की सरज़मीं एक बार फिर बारूद की गंध से भर उठी।हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत उनके बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं।...

United States Israel Strike Kills Ali Khamenei
अमेरिका–इस्राइल के संयुक्त हमले में मारे गए सुप्रीम लीडर खामेनेई- फोटो : social Media

US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया की सरज़मीं एक बार फिर बारूद की गंध से भर उठी। आसमान से बरसती आग, मिसाइलों की गर्जना और ड्रोन हमलों की गूंज के बीच अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान पर बड़ा हमला बोल दिया। तेहरान समेत कई अहम शहरों पर हवाई हमले हुए। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी कई मुल्कों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे क्षेत्र में जंग का अलार्म बज उठा।इस जंगी मंजरनामे के बीच सबसे बड़ा दावा सामने आया इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए। बाद में ईरानी मीडिया की ओर से भी उनकी मौत की पुष्टि की खबरें आईं।यह हमला शनिवारकी सुबह तेहरान स्थित खामेनेई के घर और दफ्तर को निशाना बनाकर किया गया था। हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी मारे गए हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से चला आ रहा खामेनेई का 47 साल पुराना दौर अब खत्म हो गया है।इस घटना के बाद ईरान सरकार ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।

खामेनेई को वॉशिंगटन लंबे अरसे से अपना जानी दुश्मन मानता रहा है। अमेरिकी दलील रही कि वह ईरान की अवाम को सख़्त निज़ाम से आज़ाद कराना चाहता है। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अत्याधुनिक खुफिया तंत्र और ट्रैकिंग सिस्टम से खामेनेई बच नहीं सके। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की आईआरजीसी और सुरक्षा बलों के पास अब दो ही रास्ते हैं सरेंडर या तबाही।

जंग के इस धुएं के बीच तेहरान से एक और बड़ा ऐलान हुआ। ईरान ने नए कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अहमद वाहिदी का नाम सामने रखा है। उन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान सौंपी गई है। 1988 से 1998 तक वे कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं वह इकाई जो विदेशी ऑपरेशनों और गुप्त सैन्य अभियानों के लिए जानी जाती है। वे पूर्व में रक्षा मंत्री और गृह मंत्री भी रह चुके हैं।हालांकि वाहिदी का अतीत भी विवादों से घिरा रहा है। 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स स्थित AMIA यहूदी केंद्र पर हुए बम विस्फोट में कथित भूमिका के चलते वे इंटरपोल की रेड नोटिस सूची में रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने उन पर परमाणु कार्यक्रम और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर कई पाबंदियां लगा रखी हैं।

उधर ट्रंप ने साफ कर दिया है कि भारी और सटीक बमबारी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित नहीं हो जाती। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सेना और सुरक्षा बलों के कई अधिकारी अब लड़ाई के मूड में नहीं हैं और सुरक्षा की तलाश में हैं।पश्चिम एशिया इस वक्त जंग और सियासत के सबसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। सत्ता परिवर्तन, जवाबी हमले और वैश्विक ध्रुवीकर हर संकेत बता रहा है कि यह महज़ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक भूचाल है। अब सवाल यही है क्या यह जंग एक नए दौर की शुरुआत है या फिर शांति की आख़िरी जंग?

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