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शुभेंदु अधिकारी के करीबियों की मौत का रहस्य: 13 साल में 4 सहयोगियों की गई जान

श्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी के दो पीए, एक बॉडीगार्ड और एक ड्राइवर की पिछले 13 सालों में संदिग्ध मौत हो चुकी है। जानिए प्रदीप झा से लेकर चंद्रनाथ रथ तक की पूरी कहानी।

Suvendu Adhikari assistants death history

पश्चिम बंगाल की राजनीति के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबियों और स्टाफ सदस्यों की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है. पिछले 13 वर्षों (2013 से 2026) के दौरान उनके 4 बेहद करीबी सहयोगियों की असामान्य परिस्थितियों में जान जा चुकी है. इन घटनाओं में उनके पर्सनल असिस्टेंट (PA), बॉडीगार्ड और ड्राइवर शामिल हैं, जिनकी मौतों ने समय-समय पर राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

फुटपाथ पर मिला था पहले पीए का शव

इस सिलसिले की शुरुआत साल 2013 में हुई, जब शुभेंदु अधिकारी के तत्कालीन पीए प्रदीप झा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. 3 अगस्त 2013 को उनका शव कोलकाता के स्ट्रेंग रोड पर फुटपाथ पर पाया गया था. जांच के दौरान उनके शरीर में शराब के अंश और चेहरे पर चोट के निशान मिले थे. हालांकि, एक दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनकी मौत की आधिकारिक वजह आज तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है.

बॉडीगार्ड और ड्राइवर की अस्वाभाविक मौत

साल 2018 में शुभेंदु के आवास के पास स्थित पुलिस बैरक में उनके बॉडीगार्ड शुभ्रता चक्रवर्ती को सिर में गोली लगी हालत में पाया गया, जिनकी अगले दिन मौत हो गई. शुरुआत में इसे आत्महत्या माना गया, लेकिन 2021 में उनकी पत्नी के हत्या के आरोपों के बाद CID ने नए सिरे से जांच शुरू की. इसके बाद 2021 के नंदीग्राम चुनाव के ठीक बाद शुभेंदु के पुराने सहयोगी और ड्राइवर पुलक लाहरी की भी 'अस्वाभाविक' मौत की खबर आई, जो टीएमसी के दिनों से ही उनके साथ जुड़े हुए थे.

ताजा मामला: मध्यमग्राम में पीए की सरेआम हत्या

मौतों का यह सिलसिला साल 2026 में भी जारी रहा, जब 6 मई की रात शुभेंदु के मौजूदा पीए चंद्रनाथ रथ की बेरहमी से हत्या कर दी गई. हमलावरों ने मध्यमग्राम में उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी को रोककर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर फरार हो गए, जिसने एक बार फिर बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हत्याओं के मुद्दे को गरमा दिया है.

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मौतों पर छिड़ी राजनीतिक जंग

इन सभी घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी तूल पकड़ा है और भाजपा व टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) इन घटनाओं को सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध और गहरी साजिश का हिस्सा करार दे रही है. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके. फिलहाल, इन रहस्यमयी मौतों के पीछे का असली सच अब भी फाइलों में दबा हुआ है.