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प्रेस वार्ता रोके जाने पर भड़के मुकेश सहनी : कहा-यूपी में अघोषित इमरजेंसी, हमें आतंकवादी की तरह घेरा जा रहा

गोरखपुर में वीआईपी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की प्रस्तावित प्रेस वार्ता को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर मुकेश सहनी ने यूपी सरकार पर बड़ा हमला बोला है.....

प्रेस वार्ता रोके जाने पर भड़के मुकेश सहनी : कहा-यूपी में अघ
यूपी सरकार पर भड़के मुकेश सहनी- फोटो : देवांशु प्रभात

Gorakhpur/Patna : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की प्रस्तावित प्रेस वार्ता को पुलिस ने रोक दिया। बिलंदपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम से पहले ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें बीच सड़क पर रोक लिया, जिसके बाद वीआईपी कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक हुई। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि राज्य में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और यहां पूरी तरह से "अघोषित इमरजेंसी" और "गुंडा राज" लागू है।


सड़क पर रोकना संविधान का अपमान, करें गिरफ्तार

मुकेश सहनी ने पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कहा कि किसी भी नागरिक को बिना किसी वैधानिक कारण के बीच सड़क पर रोकना पूरी तरह से गैर-संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि संविधान से ऊपर न तो प्रधानमंत्री हैं और न ही कोई मुख्यमंत्री या बड़ा अधिकारी। सहनी ने चुनौती देते हुए कहा, "अगर मैंने कोई अपराध किया है तो मुझे नोटिस दें या गिरफ्तार करें, लेकिन इस तरह सड़क पर रोकना नागरिक अधिकारों का हनन है।" उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को नसीहत दी कि वे जनता के सेवक हैं, मालिक नहीं और उनका वेतन जनता के टैक्स के पैसे से आता है।


प्रशासनिक तानाशाही और अनुमति रद्द करने का आरोप

वीआईपी प्रमुख ने आरोप लगाया कि गोरखपुर में कार्यक्रम के आयोजन के लिए उनकी पार्टी द्वारा विधिवत अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर पत्र जारी कर कार्यक्रम को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें गोरखपुर में केवल रात्रि प्रवास करना था और अगले दिन मुंबई के लिए निकलना था, लेकिन प्रशासन उन्हें जिले में रुकने तक नहीं देना चाहता। सहनी ने कहा कि उन्हें आतंकवादी की तरह घेरा जा रहा है, जिससे न केवल उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीना जा रहा है, बल्कि सड़क जाम होने से आम नागरिकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।


निषाद समाज की आवाज दबाने की साजिश

मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर विपक्षी नेताओं को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के कार्यक्रमों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सभाओं की स्वीकृतियां निरस्त की जा रही हैं और होटल संचालकों पर प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने पुराना वाकया याद दिलाते हुए कहा कि इससे पहले उन्हें लखनऊ में भी हाउस अरेस्ट (नजरबंद) रखा गया था। सहनी के मुताबिक, यह सब केवल निषाद समाज की एकजुटता को तोड़ने और उनके हक-आरक्षण की आवाज को दबाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन उनका समाज अब यह अन्याय बिल्कुल नहीं सहेगा।


आरक्षण के लिए अल्टीमेटम और संकल्प यात्रा का ऐलान

आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए सहनी ने कहा कि उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को 6 महीने का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें से 3 महीने बीत चुके हैं। यदि बाकी बचे 3 महीनों में निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला, तो वीआईपी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर पूरे प्रदेश में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने साफ किया कि समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए उनकी 101 दिवसीय 'संकल्प यात्रा' किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगी। चाहे जितनी भी प्रशासनिक बाधाएं खड़ी की जाएं, उनके कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे और जनता के सहयोग से इस अन्याय का लोकतांत्रिक जवाब देंगे।


देवांशु प्रभात की रिपोर्ट