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love story: सच्ची मोहब्बत... मृत घोषित पत्नी और पति की 575 दिन वाली तपस्या, रूह को झकझोर देगी अटूट विश्वास की प्रेम कहानी

राजस्थान के विजेंदर सिंह राठौर ने अपने विश्वास और प्रेम की ताकत से अपनी पत्नी लीला को 19 महीनों की खोज के बाद उत्तराखंड बाढ़ के बाद ढूंढ निकाला। यह कहानी सच्चे प्रेम और समर्पण की मिसाल है।

love story: सच्ची मोहब्बत... मृत घोषित पत्नी और पति की 575 द
लव स्टोरी- फोटो : SOCIAL MEDIA

valentine special love story: प्रेम का आधार केवल भावनाएं नहीं होतीं, बल्कि विश्वास और समर्पण से भरी होती है। यह विश्वास ही है जो किसी भी प्रेम कहानी को मजबूत बनाता है। ऐसी ही एक अद्वितीय प्रेम कहानी है राजस्थान के विजेंदर सिंह राठौर और उनकी पत्नी लीला की, जो सच्चे प्रेम और अटूट विश्वास की मिसाल बन चुकी है।

चार धाम की यात्रा और अकल्पनीय विपत्ति

विजेंदर सिंह राठौर अपनी पत्नी लीला और बच्चों के साथ उत्तराखंड में चार धाम की यात्रा पर निकले थे। विजेंदर, जो एक टूर ऑपरेटर थे, अपने परिवार के साथ इस धार्मिक यात्रा पर आए थे। उन्हें नहीं पता था कि इस यात्रा के दौरान उनका जीवन एक भयानक मोड़ लेने वाला है। जून 2013 की विनाशकारी बाढ़ ने विजेंदर के जीवन को तहस-नहस कर दिया। उस बाढ़ में उनकी पत्नी लीला लापता हो गई और जीवन की सभी खुशियां भी जैसे बह गईं।

सरकारी घोषणा और विजेंदर का विश्वास

बाढ़ के बाद सरकारी फाइलों में लीला को मृत घोषित कर दिया गया और परिवार को मुआवजे के रूप में 9 लाख रुपये मिल गए। लेकिन विजेंदर का दिल इस सच को स्वीकार नहीं कर पाया। उन्होंने अपने दिल की आवाज सुनी और यह विश्वास किया कि उनकी पत्नी अभी जीवित है। उन्होंने ठान लिया कि वे लीला को ढूंढने निकलेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।

लीला की खोज का कठिन सफर

विजेंदर ने अपने बच्चों को घर पर छोड़कर उत्तराखंड के हर गांव और हर शहर में लीला की खोज शुरू की। उन्होंने लीला की तस्वीर हर किसी को दिखाई, हर किसी से पूछा कि क्या उन्होंने उसे कहीं देखा है। कई लोगों ने विजेंदर को समझाया कि लीला अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका विश्वास अडिग था। उनका मानना था कि लीला जिंदा है, और यही विश्वास उन्हें आगे बढ़ाता रहा।

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19 महीने बाद लीला की वापसी

लगभग 19 महीनों की कठिन खोज के बाद, जनवरी 2015 में विजेंदर का अटूट विश्वास सच साबित हुआ। उन्हें उत्तराखंड के गंगोली गांव में लीला मिली, जो मानसिक स्थिति बिगड़ने के कारण भीख मांग रही थी और अपने पति विजेंदर को भी पहचान नहीं पा रही थी। विजेंदर के लिए यह क्षण भावनाओं से भरा हुआ था। वह अपनी लीला को वापस अपने घर ले आए और परिवार के प्रेम ने धीरे-धीरे लीला को ठीक करना शुरू कर दिया।

प्रेम की विजय

विजेंदर सिंह राठौर और लीला की यह कहानी केवल एक पति-पत्नी के बीच के प्रेम की नहीं है, बल्कि यह उस अटूट विश्वास की कहानी है जिसने असंभव को संभव कर दिखाया। यह कहानी दिखाती है कि सच्चा प्रेम किसी भी कठिनाई को पार कर सकता है और विश्वास ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

विजेंदर सिंह राठौर की प्रेम कहानी

विजेंदर सिंह राठौर की यह प्रेम कहानी हमें यह सिखाती है कि जब प्रेम सच्चा और विश्वास अडिग हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने रिश्तों में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।