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नदी में भटक गई नाव, सवार डेढ़ दर्जन शिक्षक बीच नदी में ढूंढ़ते रहे सुरक्षित किनारा, सांसत में फंसी रही जान

नदी में भटक गई नाव, सवार डेढ़ दर्जन शिक्षक बीच नदी में ढूंढ़

SAHARSA : सहरसा में समय पर स्कूल पहुंचने के लिए करीब डेढ़ दर्जन शिक्षक नाव पर सवार हो गए, लेकिन इसके कुछ देर बाद ही मौसम खराब हो गया और नाव बीच नदी में लगभग दो घंटे  तक भटकती रही। इस दौरान बीच नदी में सभी शिक्षकों की सांसे आनेवाले खतरे को लेकर अटकी रही। किसी तरह वह किनारे पहुंचे। जिसके बाद अब शिक्षकों ने प्रशासन के सामने बाढ़ अवधि में स्कूलों में छुट्टी देने की मांग कर दी है।

दरअसल. सहरसा जिले के कोसी पूर्वी तटबंध के ई-टू घाट से मध्य विद्यालय परताहा बरहारा के लिए डेढ़ दर्जन से अधिक शिक्षक एक नाव पर सवार होकर सुबह 7 बजे विद्यालय के लिए प्रस्थान किए.ई- टू घाट से नाव 7 बजे खुली जरूर लेकिन 9 बजे तक भी किनारा नहीं लग सकी. जबकि प्रत्येक दिन शिक्षकों को मात्र 45 मिनट में ही पूर्वी भाग से पश्चिमी भाग तक लेकर नाविक चले जाते थे.

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नाविक को नहीं पता लग रहा था कहां है किनारा

 लेकिन इस दिन शिक्षकों को लेकर चली नाव एक से डेढ़ घंटे तक करीब 4 से 5 किलोमीटर की दूरी में भटकती रही. बताया गया कि कुहासा के कारण नाविक को किनारे का पता नहीं चल रहा था। जिस कारण नाव पर बैठे डेढ़ दर्जन से अधिक शिक्षकों की सांस अटक चुकी थी. वो अपनी जान की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन व ईश्वर से गुहार लगाते नजर आए।

वीडियो बनाकर किया पोस्ट

नाव पर सवार शिक्षकों ने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर इसे मुद्दा बनाया. उन्होंने जिला प्रशासन से बाढ़ की अवधि में छुट्टी देने या पूर्वी तटबंध के पूर्वी भाग के ही किसी विद्यालय में प्रतिनियुक्ति करने की मांग की है। ताकि जान जोखिम में डालकर विद्यालय उन्हें नहीं जाना पड़े. शिक्षकों ने यह भी कहा कि बाढ़ की अवधि में विद्यालय में बच्चे नहीं आते हैं। शिक्षक सब अपनी उपस्थिति बनाकर ही विद्यालय से सुबह शाम लौट जाते हैं।

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डेढ़ घंटे बाद पहुंचे किनारे 

बताते चलें कि करीब एक से डेढ़ घंटे तक नदी में भटकने के बाद शिक्षकों का नाव किनारे लगा और नाव में सवार सभी शिक्षक किसी तरह अपनी जान बचाते हुए अपने विद्यालय तक पहुंच गए. राहत की खबर यह है कि इस घटना में कोई हताहत नही हुई है.

शिक्षकों को समय पर पहुंचना मजबूरी

लगातार बारिश के कारण उत्तर बिहार की कई नदियां उफान पर है। कई इलाकों में बाढ़ के हालात हैं। सड़कों पर पानी जमा होने के कारण आने जाने के लिए अब नाव ही लोगों के लिए आने-जाने का सहारा बना हुआ है। हर कोई इससे प्रभावित है। बिहार के शिक्षक भी, जिन्हें समय पर स्कूल पहुंचना मजबूरी है।