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कैसे हुई थी गुरु पूर्णिमा की शुरुआत, आखिर क्यों खास है आज का दिन, गुरु पूजा का विशेष महत्व जानिए...

कैसे हुई थी गुरु पूर्णिमा की शुरुआत, आखिर क्यों खास है आज का

PATNA: देशभर में आज धूमधाम से गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जा रहा है। आज के दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों का पूजन कर इनका आशीर्वाद लेते हैं। साथ ही उन्हें गुरु दक्षिणा देते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार गुरु पूर्णिमा का ये पर्व आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा क्यों माना जाता है। और इस दिन का महत्व क्यों है?

भारत में गुरु को भगवान के समान माना गया है। गुरु द्वारा दिए ज्ञान से ही भगवान की भक्ति प्राप्त होती है। इस दिन की इतिहास की बात करें तो हिंदू धर्म के ग्रंथों में से एक महाभारत की रचना महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास जी ने की थी। वेदव्यास जी महर्षि पाराशर और माता सत्यवती के पुत्र थे। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन ही उनका जन्म हुआ था।

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वेदव्यास जी के शिष्यों ने उनकी जन्म तिथि पर गुरु के पूजन की शुरुआत की थी और उन्हें गुरु दक्षिणा दी थी। सिर्फ यही नहीं, इसी दिन, भगवान बुद्ध ने भी अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया था। हर इंसान के जीवन में कोई न कोई गुरु होता है। हम सब के जीवन में कोई न कोई हमारा आदर्श होता है। इस दिन सभी लोगों को अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करना होता है। ऐसा करने से न सिर्फ गुरु और शिष्य के बीच का संबंध अच्छा होता है बल्कि दोनों को एक दूसरे के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है। 

यह दिन केवल आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले गुरु से ही नहीं जुड़ा है। कई लोग इस दिन उनका भी सम्मान करते हैं, जिन्होंने उन्हें जीवन में मार्गदर्शन दिया। इस दिन मंदिरों और जरूरतमंदों को दान करने का भी बड़ा महत्व माना गया है। इस दिन कई लोग उनका भी सम्मान करते हैं, जिन्होंने उन्हें जीवन में मार्गदर्शन दिया।

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