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कोसी का कहर: मौजहा में कटाव का तांडव, अपने ही हाथों आशियाना उजाड़ने को मजबूर हुए लोग

सुपौल जिले में कोशी ने अपना कहर दिखाना शुरु कर दिया है। नदी का कटाव तेजी से घनी आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे दर्जनों परिवारों पर विस्थापन का गंभीर संकट मंडराने लगा है.....

कोसी का कहर: मौजहा में कटाव का तांडव, अपने ही हाथों आशियाना
सुपौल कोसी का कहर- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के किशनपुर प्रखंड अंतर्गत मौजहा पंचायत के वार्ड संख्या 13 और 14 में कोसी नदी ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। नदी का कटाव तेजी से घनी आबादी वाले इलाकों की ओर बढ़ रहा है, जिससे दर्जनों परिवारों पर विस्थापन का गंभीर संकट मंडराने लगा है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कटाव की जद में आने से बचने के लिए अब तक 10 से अधिक परिवारों ने मजबूरी में अपने हाथों से अपने वर्षों पुराने घरों को तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।

आशियाना बचाने की मची होड़, बच्चों और मवेशियों को लेकर बढ़ी चिंता

विद्यानंद यादव, संजय यादव, महेंद्र यादव, रोशन यादव और अरविंद यादव समेत कई ग्रामीणों के घर और उपजाऊ जमीन नदी की तेज धाराओं में समाने के कगार पर हैं। कटाव की तीव्र रफ्तार के कारण लोगों को अपने घर का सामान सुरक्षित निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण सबसे पहले अपने बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं, जिसके बाद ईंट, लकड़ी और बाकी बचा हुआ सामान बचाने में जी-जान से जुटे हैं।

प्रशासनिक मदद की गुहार, युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य की मांग

प्रभावित परिवारों के सामने अब न केवल सिर छिपाने की छत का संकट है, बल्कि रोजी-रोटी, बच्चों की शिक्षा और मवेशियों के चारे की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से प्रभावित क्षेत्र का तत्काल सर्वे कराकर राहत सामग्री वितरण और स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने तुरंत युद्धस्तर पर कटावरोधी (एंटी-इरोजन) कार्य शुरू नहीं कराया, तो पूरी बस्ती नदी में समा जाएगी।

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कोसी बैराज से 2.26 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज, बढ़ा जलस्तर का दबाव

कटाव के साथ-साथ कोसी नदी में पानी के लगातार बढ़ते दबाव ने तटीय इलाकों के निवासियों की चिंता और बढ़ा दी है। बैराज नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार 02 सितंबर 2026 को शाम 4 बजे कोसी बैराज से डाउनस्ट्रीम में 2,22,680 क्यूसेक और पश्चिमी मुख्य नहर में 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे कुल डिस्चार्ज 2,26,680 क्यूसेक तक पहुंच गया। नदी में बढ़ रहे इस भारी जलप्रवाह से कटाव की रफ्तार और अधिक तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

उजड़ते सपनों के बीच राहत के इंतजार में टिकी ग्रामीणों की निगाहें

मौजहा पंचायत के प्रभावित वार्डों से सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो ग्रामीणों की लाचारी और दर्द को बयां कर रही हैं। पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि कोसी केवल उनके मकानों को ही नहीं काट रही, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य और जिंदगी भर की कमाई को भी बहाकर ले जा रही है। हर गुजरते घंटे के साथ स्थिति बिगड़ती जा रही है और अब बेघर हुए परिवारों की अंतिम आस सरकारी सहायता व प्रशासनिक टीमों के मुआयने पर टिकी है।

विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट