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भाकपा (माओवादी) के 'थिंक टैंक' प्रशांत बोस का निधन,7 राज्यों में 200 से अधिक वारदातों के आरोपी

झारखंड के बिरसा मुंडा जेल में 1 करोड़ के इनामी नक्सली प्रशांत बोस की मौत हो गई. प्रशांत बोस प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) का टॉप लीडर और थिंक टैंक रह चुका था. वो पोलित ब्यूरो सदस्य भी रहा था. उसे किशन दा के नाम से भी जाना जाता था.

CPI Maoist think tank leader Prashant Bose passes away
भाकपा (माओवादी) के 'थिंक टैंक' प्रशांत बोस का निधन- फोटो : news 4 nation

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ 'किशन दा' की रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में मौत हो गई है। शुक्रवार की सुबह करीब 4 बजे 75 वर्षीय बोस ने अंतिम सांस ली। संगठन में महासचिव नंबला केशव राव के बाद प्रशांत बोस को सबसे प्रभावशाली नेता और मुख्य थिंक टैंक माना जाता था, जिस पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

जेल में ली अंतिम सांस, रिम्स भेजा गया शव

प्रशांत बोस लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहा था और रांची की जेल में सजा काट रहा था। जेल प्रशासन के अनुसार, सुबह उसकी स्थिति बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल भेज दिया गया है। इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता बढ़ा दी गई है।

चार दशकों का आतंक और रणनीतिक सफर

मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला प्रशांत बोस दशकों तक नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा। उसका सफर माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) से शुरू हुआ था। साल 2004 में जब MCCI और पीपुल्स वार ग्रुप का विलय होकर भाकपा (माओवादी) बना, तब बोस को नए संगठन के पोलित ब्यूरो में अहम स्थान दिया गया। उसे संगठन की नीतियों और बड़े हमलों की योजना बनाने वाला मुख्य रणनीतिकार माना जाता था।

7 राज्यों में 200 से अधिक वारदातों का आरोपी

प्रशांत बोस का खौफ केवल झारखंड तक सीमित नहीं था। सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे 7 राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों को अंजाम देने या उनकी साजिश रचने का आरोप था। कई बड़े नक्सली हमलों के पीछे उसी का दिमाग काम करता था, जिसके कारण वह लंबे समय से सुरक्षा बलों की 'मोस्ट वांटेड' सूची में शीर्ष पर था।

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2021 में पत्नी के साथ हुई थी गिरफ्तारी

किशन दा को 12 नवंबर 2021 को एक बड़े ऑपरेशन के दौरान झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से उसकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय भी वह संगठन की गतिविधियों को संचालित करने का प्रयास कर रहा था। उसकी मौत को माओवादी संगठन के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है, क्योंकि वह पुराने कैडरों और नई पीढ़ी के बीच एक वैचारिक कड़ी के रूप में कार्य करता था।