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हजारीबाग में हाथियों का खूनी तांडव: दो गांवों में 7 को कुचला, एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत

Jharkhand Elephant Attack: झारखंड के हजारीबाग जिले के चूरचू प्रखंड में जंगली हाथियों के झुंड ने देर रात गांवों में घुसकर सात लोगों को कुचलकर मार डाला. मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य और दो मासूम बच्चे शामिल हैं.

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हजारीबाग में हाथियों का खूनी तांडव: दो गांवों में 7 को कुचला, एक ही परिवार के 4 सदस्यों की मौत- फोटो : news 4 nation

झारखंड के हजारीबाग जिले के चूरचू प्रखंड में जंगली हाथियों के एक झुंड ने भारी तबाही मचाई है। गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि, हाथियों ने गोंदवार और कजरी गांवों में अचानक हमला कर दिया। इस हमले में सात ग्रामीणों की कुचलकर मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हमला उस समय हुआ जब ग्रामीण अपने घरों में गहरी नींद में सो रहे थे, जिसके कारण उन्हें जान बचाने का मौका तक नहीं मिला।

एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत

इस हृदयविदारक घटना में सबसे अधिक नुकसान गोंदवार गांव के एक ही परिवार को हुआ है। मृतकों में सूरज राम, सविता देवी, धनेश्वर राम और सुमन देवी शामिल हैं, जो एक ही परिवार के सदस्य थे। इस हमले में दो मासूम बच्चों की भी जान चली गई है, जबकि कजरी गांव की फुलमनी किस्कू भी हाथियों का शिकार बनीं। प्रशासन और वन विभाग के लिए यह घटना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है क्योंकि हाथियों का व्यवहार अत्यधिक आक्रामक देखा जा रहा है।

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झारखंड में गहराता मानव-हाथी संघर्ष

हाथियों के हमले की यह कोई इकलौती घटना नहीं है; राज्य के कई जिलों में यह संघर्ष अब भयावह रूप ले चुका है। जनवरी 2026 में पश्चिमी सिंहभूम में हाथियों ने 22 लोगों की जान ली थी, वहीं फरवरी की शुरुआत में बोकारो जिले में भी पांच लोगों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का लगातार कटना, अनियंत्रित खनन गतिविधियां और हाथियों के पारंपरिक रास्तों (कॉरिडोर) में इंसानी दखल के कारण हाथी अब भोजन और सुरक्षित स्थान की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।

ग्रामीणों में आक्रोश और सुरक्षा की मांग

लगातार हो रही मौतों और जान-माल के नुकसान से ग्रामीणों में प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग अब रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार हाथियों को भगाने के लिए ठोस कदम उठाए और 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' (प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली) जैसी तकनीक का इस्तेमाल करे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल प्रभावित गांवों में वन विभाग की टीम तैनात है, लेकिन डर का साया अब भी बरकरार है।

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