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कूल बनने के लिए आप भी करते हैं स्मोकिंग, तो हो जाएं सावधान! आपको भी हो सकती है ये बीमारी

कूल बनने के लिए आप भी करते हैं स्मोकिंग, तो हो जाएं सावधान!

आजकल का जमाना ऐसा हो गया है कि लोग और खास कर युवा पीढ़ी कुल बनने और दिखने के लिए नशा पत्ति का इस्तेमाल करने लगते हैं। फ्रेंड सर्कल में अगर उठना-बैठना है तो उन्हें लगता है कि नशा करना जरूरी है। चाहे वो धूम्रपान हो या शराब। लेकिन युवा पीढ़ियों को ये समझ नहीं आता कि ये उनके जीवन के लिए कितना हानिकारक साबित हो सकता है। डॉक्टर की मानें तो स्मोकिंग करने वालों को फेफड़ों के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। अगर स्मोकर्स को हद से ज्यादा खांसी, सांस लेने में दिक्कत या कुछ निगलने में दिक्कत हो, तो लंग कैंसर की जांच जरूर करानी चाहिए।


हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो भारत में लंग कैंसर यानी फेफड़ों के कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है। सीवियर एयर पॉल्यूशन, ज्यादा स्मोकिंग, फैमिली हिस्ट्री, केमिकल्स का संपर्क फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, थकान, घरघराहट और निगलने में समस्या होती है, तो ये लंग कैंसर के संकेत हो सकते हैं। अधिकतर लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इन लक्षणों के दिखने पर फेफड़ों की जांच जरूर कराएं।

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हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो स्मोकिंग फेफड़ों के कैंसर का सबसे प्रमुख कारण है। इसके अलावा क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है और सांस लेने में कठिनाई होती है। स्मोकिंग से ब्रोंकाइटिस का खतरा भी बढ़ जाता है। ब्रोंकाइटिस एक श्वसन तंत्र की बीमारी है, जिसमें फेफड़ों के वायु मार्ग में सूजन आ जाती है। जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और बलगम का उत्पादन बढ़ जाता है।


हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो सिगरेट के मौजूद निकोटिन रक्तचाप को बढ़ाता है, जिससे स्ट्रोक और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। स्ट्रोक का खतरा इसलिए ज्यादा होता है, क्योंकि स्मोकिंग से रक्त वाहिनियों में रक्त के थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर्स का कहना है कि फेफड़ों को हेल्दी रखने और लंग डिजीज से बचने के लिए स्मोकिंग से दूर रहना बेहद जरूरी है।

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