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Bihar School News: अब नहीं चलेगा लापरवाही का खेल! बिहार के सरकारी स्कूलों में अब ऐसे होगी पढ़ाई और अनुशासन की मॉनिटरिंग, एस सिद्धार्थ की पहल पर शुरु हुई ये व्यवस्था

Bihar School News: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई और अनुशासन से समझौता नामुमकिन होगा। ...

Bihar School
स्कूल में अब नहीं चलेगा लापरवाही का खेल!- फोटो : social Media

Bihar School News: बिहार के सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई और अनुशासन से समझौता नामुमकिन होगा। शिक्षा विभाग ने रोज़ाना ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया है, जिसके तहत हर स्कूल की गतिविधियों की तस्वीरें खींचकर विभाग तक भेजनी होंगी। किस स्कूल में प्रार्थना हुई, कितने बच्चे और शिक्षक मौजूद रहे और पढ़ाई किस स्तर की हुई—अब सबकुछ फोटो सबूत के साथ दर्ज होगा।

इस सख्त व्यवस्था की शुरुआत शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ की पहल पर हुई है। विभाग ने 20 से 22 अगस्त तक 38 जिलों से रैंडम तीन-तीन स्कूलों की तस्वीरें मंगवाकर समीक्षा की। रिपोर्ट चौंकाने वाली रही ज्यादातर स्कूलों में गतिविधियां तय दिशा-निर्देश के अनुरूप पाई गईं। यानी सिस्टम लागू होते ही असर दिखने लगा।

सुबह 9:30 बजे तक सभी शिक्षक-छात्र स्कूल में मौजूद रहना अनिवार्य है। इसके बाद आधे घंटे का चेतना सत्र होता है, जिसमें प्रार्थना, बिहार राज्य गीत, राष्ट्रगीत, सामान्य ज्ञान, प्रेरक कहानियां और बच्चों की साफ-सफाई जांच शामिल रहती है। खास बात यह है कि स्कूल शुरू होने से 15 मिनट पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा और फिर मुख्य गेट बंद कर दिया जाएगा। देर से आने वाले छात्रों को अगले दिन ही प्रवेश मिलेगा।

पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी सख्त नियम तय किए गए हैं। आदेश के मुताबिक, पहली तीन घंटियों में सिर्फ गणित, विज्ञान और हिंदी,अंग्रेजी की कक्षाएं होंगी। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों में गणितीय कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और भाषा पर पकड़ मजबूत होगी।

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मॉनिटरिंग व्यवस्था को बेहद तकनीकी और पारदर्शी बनाया गया है। हर फोटो में स्कूल का लोकेशन (आक्षांश-देशांश), समय और अन्य डिटेल्स अंकित होंगी। किसी भी समय विभागीय अधिकारी फोटो मांग सकते हैं। अगर तय समय पर गतिविधियां नहीं मिलतीं, तो स्कूल प्रमुख से लिखित जवाब तलब किया जाएगा और लापरवाही पर कार्रवाई तय है। शिक्षा विभाग के इस कदम ने सरकारी स्कूलों में अनुशासन और पढ़ाई की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब स्कूलों पर “अलर्ट मोड” का दबाव साफ दिख रहा है।