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Bihar teacher news: हर क्लास में गुरुजी, हर विषय का होगा उस्ताद! बिहार में शिक्षकों की तैनाती का ये नया फार्मूला लागू, शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

Bihar teacher news: बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की तस्वीर बदलने की कवायद अब तेज हो गई है। ...

New Teacher Deployment Formula in Bihar Subject Wise Teacher
शिक्षकों की तैनाती का नया फार्मूला लागू- फोटो : social Media

Bihar teacher news:  बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की तस्वीर बदलने की कवायद अब तेज हो गई है। लंबे समय से शिक्षकों की कमी, विषय विशेषज्ञों के अभाव और पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की तैनाती का नया और व्यापक मानक लागू कर दिया है। इस फैसले को सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी नए निर्देश के मुताबिक अब उच्च प्राथमिक कक्षाओं में प्रत्येक कक्षा के लिए कम से कम एक शिक्षक की उपलब्धता अनिवार्य होगी। साथ ही विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों को विषयवार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी और पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा।

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यह नई व्यवस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रावधानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि अब शिक्षक निर्धारण केवल पदों के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक छात्र संख्या और विषयगत आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

नए मानक के अनुसार यदि किसी विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक 105 से 140 छात्र हैं, तो वहां एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। वहीं छात्र संख्या 140 से 175 के बीच होने पर एक और अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा, जो विद्यालय की जरूरत के अनुसार संस्कृत या उर्दू विषय का शिक्षक होगा। यदि नामांकन 175 से अधिक होता है तो आवश्यकता के अनुरूप और शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।

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शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षक निर्धारण के लिए कक्षा 1 से 5 और कक्षा 6 से 8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद एक ही रहेगा।

विभागीय समीक्षा में यह सामने आया था कि राज्य के कई विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुरूप शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से नई नीति लागू की गई है। प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए मानकों के अनुसार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।सरकार को उम्मीद है कि यह नई व्यवस्था न केवल शिक्षकों की कमी दूर करेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को भी नई मजबूती देगी। अब देखना यह होगा कि यह फैसला कागजों से निकलकर कितनी तेजी से कक्षाओं तक पहुंचता है।