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Bihar Teacher News: प्रधानाध्यापक की दबंगई, डीएम के लिए किया फरमान जारी, जिलाधिकारी को स्कूल में घुसने के लिए लेना होगा हमसे आदेश

Bihar Teacher News: प्रधानाध्यापक सूरज कुमार ने अपने को डीएम से उपर मानते हुए फरमाया कि डीएम साहब भी मेरे परमिशन के बग़ैर इस स्कूल में क़दम नहीं रख सकते। जैसे यह कोई सरकारी विद्यालय न होकर उनकी जागीर हो।

Bihar Teacher News
प्रधानाध्यापक का फरमान- डीएम भी लेंगे हमसे अनुमति- फोटो : reporter

Bihar Teacher News: मुजफ्फरपुर की धरती पर शिक्षा का सूरज अब ज्ञान नहीं, बल्कि सत्ता का ताप बिखेर रहा है। जी हाँ, साहेबगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय भलूई खान से निकला एक वीडियो सोशल मीडिया पर धधकती आग की तरह फैल चुका है। वीडियो में प्रधानाध्यापक सूरज कुमार अपनी ‘शाही फरमानशाही’ का ऐलान करते दिख रहे हैं कि “डीएम  भी बिना मेरी अनुमति स्कूल में प्रवेश नहीं कर सकते।” यह बयान न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ाता है, बल्कि बताता है कि भ्रष्टाचार की गंगोत्री अब सीधे स्कूल के आँगन से बह रही है।

दरअसल, सरकार ने प्रखंड स्तर के स्कूलों की निगरानी के लिए 20 सूत्री समिति का गठन किया था। उद्देश्य था पारदर्शिता, लेकिन विडंबना यह कि निगरानी करने पहुंचे समिति अध्यक्ष मनी रोशन सिंह और प्रधानाध्यापक सूरज कुमार के बीच झगड़ा ही सुर्खियों का कारण बन गया। वीडियो में दोनों के बीच जुबानी जंग देखते ही बनती है,एक ओर भ्रष्टाचार की शिकायतों का पिटारा खोलते हुए अध्यक्ष, तो दूसरी ओर सत्ता के मद में चूर प्रधानाध्यापक। वीडियो की पुष्टि न्यूज4नेशन नहीं करता है लेकिन इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

शिकायतें भी कम चौंकाने वाली नहीं हैं। विद्यालय में अंडे की ट्रे रखी रहती है, मगर बच्चों की थाली तक वह अंडा पहुँचता नहीं। मेनू में रोज़ाना अलग-अलग भोजन देने का नियम है, लेकिन बच्चों को परोसा जाता है वही एकरस थाली जैसे शिक्षा व्यवस्था की तरह, जहाँ विविधता का वादा कर ठूँसा जाता है बस नीरसता। रसोइयों ने भी अपनी बेबसी जताई है। जिस स्कूल को बच्चों की भूख मिटानी थी, वहाँ भूख पर भी राजनीति और भ्रष्टाचार का ताला जड़ दिया गया है। प्रधानाध्यापक का अहंकार और समिति का आक्रोश मिलकर यह संकेत देता है कि शिक्षा मंदिर अब ‘दबंगई का दरबार’ बन चुका है।

सरकार की 20 सूत्री समिति का गठन यदि भ्रष्टाचार की जाँच के लिए हुआ था, तो आज यह सवाल खड़ा है कि जब प्रधानाध्यापक खुद को डीएम से भी ऊपर मानने लगे, तो फिर निगरानी का औचित्य ही क्या बचा? यह नजारा बताता है कि प्रशासनिक तंत्र कागज़ों में चौकस है, लेकिन जमीनी हकीकत में शिक्षा की नींव खोखली हो चुकी है।

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मुजफ्फरपुर का यह वीडियो सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि पूरे तंत्र का आईना है। जहाँ मासूम बच्चों की थाली से अंडा गायब है, लेकिन दबंगई और भ्रष्टाचार की प्लेट हमेशा भरी हुई। और सवाल यही हैकि जब शिक्षा का चौकीदार ही भ्रष्टाचार का पहरेदार बन जाए, तो आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान का उजाला कौन देगा?

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा