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Bihar Teacher News: शिक्षकों को मिला मनचाहा जिला चुनने का हक, सरकार को 6 हफ्ते का अल्टीमेटम, हाईकोर्ट ने रद्द किया सरकार का आदेश

Bihar Teacher News: हजारों एक्सक्लूसिव शिक्षकों के चेहरे पर राहत की रौशनी फैला दी है, जबकि सरकार की नियुक्ति नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।...

Bihar Teachers Win Transfer Right HC Quashes Govt Order 6 We
शिक्षकों को मनचाहे जिले में मिलेगी पोस्टिंग!- फोटो : X

Bihar Teacher News: बिहार की सियासत और शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक भूचाल आ गया है। पटना हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले ने हजारों एक्सक्लूसिव शिक्षकों के चेहरे पर राहत की रौशनी फैला दी है, जबकि सरकार की नियुक्ति नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह फैसला सिर्फ एक न्यायिक आदेश नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में अधिकार, नियम और भरोसे की नई बहस को जन्म देने वाला कदम माना जा रहा है। दरअसल, यह पूरा मामला बिहार के एक्सक्लूसिव शिक्षक भर्ती एवं पोस्टिंग प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, जहां फरवरी 2024 में दक्षता परीक्षा पास करने वाले 350 से अधिक शिक्षकों ने अपनी नियुक्ति और जिला आवंटन को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा एकलपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि इन शिक्षकों को मनचाहा जिला चुनने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

हाईकोर्ट ने बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा 21 दिसंबर 2024 को जारी उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें शिक्षकों के नियुक्ति पत्र और पोस्टिंग प्रक्रिया को प्रभावित किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जब चयन प्रक्रिया बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2023 के तहत पूरी हुई है, तो बाद में नियम बदलकर लाभ को सीमित करना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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इस पूरे विवाद की जड़ 2023 की नई नियमावली है, जिसे सरकार ने स्थानीय निकाय शिक्षकों को राज्य स्तरीय सेवा शर्तों के तहत लाने के उद्देश्य से लागू किया था। इस नियम के तहत एक्सक्लूसिव शिक्षक की नई श्रेणी बनाई गई और दक्षता परीक्षा को अनिवार्य किया गया। साथ ही यह भी प्रावधान था कि शिक्षक अपनी पोस्टिंग के लिए तीन पसंदीदा जिलों का विकल्प दे सकते हैं।

लेकिन बाद में सरकार ने इस प्रक्रिया में संशोधन करते हुए पहले जारी नियुक्ति पत्र रद्द कर दिए और शिक्षकों को पुराने कार्यस्थलों पर लौटने का निर्देश दे दिया। इसी फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि जब पूरी चयन प्रक्रिया एक तय नियमावली के तहत पूरी हो चुकी थी, तो बीच में नियम बदलकर उनके अधिकारों को खत्म करना प्राकृतिक न्याय और वैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष गिरि और सुमिक झा ने मजबूत पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि यह मामला सिर्फ नौकरी का नहीं बल्कि भरोसे और नियमों की स्थिरता का भी है।

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हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमत होते हुए राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि आगामी 6 सप्ताह के भीतर सभी शिक्षकों के नियुक्ति पत्र बहाल किए जाएं और जिला आवंटन के अनुसार उनकी पदस्थापना सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक फैसलों में बार-बार बदलाव से हजारों शिक्षकों का भविष्य अस्थिर नहीं किया जा सकता।

इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आने वाले समय में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं और नियमावली में स्थिरता और पारदर्शिता की मांग को और मजबूत करेगा।

वहीं राजनीतिक गलियारों में भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे सरकार की नीति अस्थिरता का उदाहरण बता रहा है, जबकि सरकार इसे तकनीकी और प्रशासनिक पुनर्विचार की प्रक्रिया के तौर पर देख रही है। कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ एक्सक्लूसिव शिक्षकों के लिए राहत की सांस लेकर आया है, बल्कि बिहार की पूरी शिक्षा व्यवस्था में नियम, अधिकार और न्याय के संतुलन को लेकर एक नई बहस भी छेड़ गया है।