LATEST NEWS

  • Tej Pratap Yadav Death Threat
  • तेजप्रताप यादव को दोपहर 3:11 बजे आया खौफनाक कॉल! वीडियो वायरल करने की धमकी से मचा हड़कंप, सरकार

  • Bihar News : मोकामा नगर परिषद कर्मचारी पर महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप, कहा अश्लील फोटो वायरल करने की दी धमकी
  • Bihar News : मोकामा नगर परिषद कर्मचारी पर महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप, कहा अश्लील फोटो वायरल

  • Fatuha Patna Liquor Raid
  • कानपुर से पटना पहुंची सवा करोड़ की शराब! खाद की बोरियों के नीचे छिपाकर लाई गई,उत्पाद विभाग का

  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने दहेज़ प्रताड़ना के आरोपी पति अमरजीत कुमार को दी जमानत, 7 महीने से जेल में था बंद
  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने दहेज़ प्रताड़ना के आरोपी पति अमरजीत कुमार को दी जमानत, 7 महीने

  • Bihar News : गया में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रक पर लोड विदेशी शराब की बड़ी खेप किया बरामद, चालक को किया गिरफ्तार
  • Bihar News : गया में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रक पर लोड विदेशी शराब की बड़ी खेप

Bihar Education News: हाजिरी लगाकर गायब हुए गुरूजी तो जाएगी नौकरी! शिक्षा मंत्री का शिक्षकों को सख्त अल्टीमेटम, पढ़ाई भी चाहिए जनाब!

Bihar Education News:सरकार ने उन शिक्षकों को साफ चेतावनी दे दी है जो स्कूल में सिर्फ दस्तखत करने, हाजिरी लगाने और फिर रफूचक्कर हो जाने की आदत पाल चुके हैं।....

Bihar Minister Warns Absentee Teachers Attendance Alone Wono
हाजिरी लगाकर गायब हुए गुरूजी तो जाएगी नौकरी- फोटो : News4Nation

Bihar Education News: बिहार की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सत्ता के गलियारों से सख्त संदेश जारी हुआ है। सरकार ने उन शिक्षकों को साफ चेतावनी दे दी है जो स्कूल में सिर्फ दस्तखत करने, हाजिरी लगाने और फिर रफूचक्कर हो जाने की आदत पाल चुके हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोई शिक्षक सिर्फ औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराकर स्कूल से गायब पाया गया तो जांच होगी और दोष साबित होने पर नौकरी तक जा सकती है।

दरअसल, बिहार में सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ विद्यालयों में शिक्षक समय पर पहुंचते तो हैं, लेकिन कक्षा में पढ़ाने के बजाय दूसरे कामों में मशगूल हो जाते हैं या फिर उपस्थिति दर्ज कराकर स्कूल छोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं।

Diarch GO

शिक्षा मंत्री का यह बयान केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी माना जा रहा है। सरकार यह दिखाना चाहती है कि शिक्षा सुधार केवल नई योजनाओं, भवन निर्माण या बजट बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि जवाबदेही तय करने से होगा। आखिर जब शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी से किनारा कर लेंगे तो शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद कैसे मजबूत होगी?

सरकार ने अधिकारियों को भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि स्कूलों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। नियमित निरीक्षण हो, शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति की जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चे कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विभाग का मानना है कि केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति या रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षक की असली पहचान उसके कक्षा संचालन, विद्यार्थियों के साथ संवाद और शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी से होगी।

NSIT
Nsmch

सूत्रों के अनुसार, जांच में यदि यह साबित हो जाता है कि किसी शिक्षक ने जानबूझकर अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरती है या बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित किया है, तो उसके खिलाफ निलंबन से लेकर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। यानी अब शिक्षा विभाग "काम नहीं तो आराम नहीं" के सिद्धांत पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

हालांकि इस मुद्दे का दूसरा पहलू भी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जवाबदेही जरूरी है, लेकिन सरकार को स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों के रिक्त पद, गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल कार्रवाई की तलवार लटकाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि बेहतर कार्य वातावरण भी उपलब्ध कराना होगा।

सत्ता का संदेश बिल्कुल साफ है। अब स्कूलों में सिर्फ हाजिरी लगाने से काम नहीं चलेगा। सरकार चाहती है कि शिक्षक बच्चों के भविष्य को संवारने की अपनी मूल जिम्मेदारी निभाएं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सख्ती केवल सरकारी फाइलों और बयानों तक सीमित रहती है या फिर वास्तव में सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने का जरिया बनती है। क्योंकि शिक्षा की लड़ाई में सबसे बड़ा सवाल यही है कक्षा में मौजूद शिक्षक सिर्फ कुर्सी भर रहे हैं या भविष्य गढ़ रहे हैं?

रिपोर्ट- नमोनारायण मिश्रा