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Bihar Education News: बिहार में शिक्षकों के तबादले पर नई नीति, राज्यपाल का बड़ा फैसला, जून के बाद ट्रास्फर पर लगेगी रोक

Bihar Education News: राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक अब पूरे साल में केवल एक बार ही ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी ....

Bihar Limits University Transfers to Once a Year Only
बिहार में शिक्षकों के तबादले पर नई नीति- फोटो : social Media

Bihar Education News: बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मियों के तबादले को लेकर अब नई और सख्त व्यवस्था लागू कर दी गई है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी नई गाइडलाइन के मुताबिक अब पूरे साल में केवल एक बार ही ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसे हर वर्ष जून महीने तक समाप्त करना अनिवार्य होगा। जून के बाद होने वाले किसी भी तबादले को सामान्य नहीं, बल्कि अपवाद की श्रेणी में माना जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत जून के बाद यदि किसी कर्मचारी या शिक्षक का तबादला आवश्यक समझा जाता है, तो इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। इस कदम का मकसद शैक्षणिक सत्र के बीच होने वाले बार-बार के तबादलों पर रोक लगाना और पढ़ाई, परीक्षा तथा प्रशासनिक कार्यों में पैदा होने वाली रुकावटों को खत्म करना है।

राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह द्वारा सभी कुलपतियों को भेजे गए निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि लगातार होने वाले तबादलों से न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के प्रशासनिक कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। यही वजह है कि अब ट्रांसफर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, एकरूप और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

नई गाइडलाइन के अनुसार तबादले का आधार किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि संस्थान की वास्तविक आवश्यकता होगी। इसमें स्वीकृत पदों की उपलब्धता, विषयवार शिक्षकों का संतुलित वितरण, आरक्षण रोस्टर, छात्रों की संख्या और शैक्षणिक जरूरतों जैसे मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी या अधिकता की स्थिति पैदा न हो।

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राजभवन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत प्रभाव, सिफारिश या बाहरी दबाव से मुक्त होगी। निर्धारित मानकों से हटकर तबादले केवल अत्यंत सहानुभूतिपूर्ण और विशेष परिस्थितियों में ही किए जा सकेंगे।शिक्षा जगत में इस फैसले को एक बड़े प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक निरंतरता बनी रहेगी, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और तबादलों को लेकर होने वाले विवादों तथा मनमानी पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।