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B.Ed-D.El.Ed New Rule: शिक्षक बनने के लिए अब नए नियम, 2026 से B.Ed–D.El.Ed के लिए नई व्यवस्था, लाखों युवाओं पर पड़ेगा असर

B.Ed-D.El.Ed New Rule: शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। 2026 से B.Ed–D.El.Ed के लिए नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। जिसका असर लाखों युवाओं पर पड़ेगा।

B.Ed-D.El.Ed New Rule
B.Ed-D.El.Ed New Rule- फोटो : social media

B.Ed-D.El.Ed New Rule:  अगर आप भी शिक्षक बनना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, शिक्षकों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने बड़ा फैसला लिया है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत वर्ष 2026-27 सत्र से शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव लागू किए जाएंगे। इसका सीधा असर उन लाखों युवाओं पर पड़ेगा, जो B.Ed और D.El.Ed कर चुके हैं या शिक्षण के क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

नए पाठ्यक्रम होंगे लागू 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब शिक्षकों की ट्रेनिंग को अधिक गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक बनाया जाएगा। इसके तहत पुराने पाठ्यक्रमों की जगह नए और अपडेटेड कोर्स लागू होंगे। अब तक ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य रहे 2 वर्षीय B.Ed की व्यवस्था में बदलाव करते हुए 1 वर्षीय B.Ed और 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) को प्राथमिकता दी जा रही है।

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12वीं के बाद 4 साल का ITEP

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पोस्ट ग्रेजुएशन (MA/MSc/MCom) कर चुके अभ्यर्थियों के लिए अब केवल 1 साल का B.Ed कोर्स शुरू किया जाएगा। वहीं, 12वीं के बाद सीधे शिक्षक बनने की इच्छा रखने वाले छात्रों को 4 साल का ITEP करना अनिवार्य होगा। इसमें ग्रेजुएशन और B.Ed दोनों की पढ़ाई एक साथ होगी। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षक केवल डिग्री धारक न हों, बल्कि आधुनिक शिक्षण तकनीक, टेक्नोलॉजी, कोडिंग और बच्चों के मनोविज्ञान (पेडागॉजी) में भी दक्ष हों।

प्राइमरी स्कूल के लिए B.Ed अमान्य

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कक्षा 1 से 5 (प्राइमरी) के शिक्षकों के लिए B.Ed मान्य नहीं होगा। इस स्तर पर शिक्षक बनने के लिए D.El.Ed या ITEP (Foundational Stage) जरूरी होगा। हालांकि, D.El.Ed को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा, बल्कि इसे धीरे-धीरे ITEP में समाहित किया जाएगा।

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पुराने कोर्स करने वालों को राहत

NCTE ने साफ किया है कि जो छात्र अभी B.Ed या D.El.Ed कर रहे हैं, उनकी डिग्री पूरी तरह मान्य रहेगी। उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। नए नियम केवल भविष्य के सत्रों पर लागू होंगे।

B.Ed या D.El.Ed: किसके लिए क्या?

जो अभ्यर्थी प्राइमरी स्तर (कक्षा 1–5) में पढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए D.El.Ed/ITEP सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। जो TGT या PGT यानी उच्च कक्षाओं के शिक्षक बनना चाहते हैं, उनके लिए B.Ed अनिवार्य होगा। पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए 1 वर्षीय B.Ed समय और खर्च दोनों बचाएगा।

1 वर्षीय B.Ed की पात्रता

नए 1-वर्षीय B.Ed कोर्स के लिए पात्रता शर्तें कड़ी होंगी। इसके लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में Master’s Degree होना जरूरी है। इसके अलावा 4 वर्षीय ग्रेजुएशन (जैसे B.Tech या ऑनर्स डिग्री) करने वाले छात्र भी पात्र हो सकते हैं। प्रवेश के लिए NCET (National Common Entrance Test) जैसी परीक्षाएं आयोजित की जा सकती हैं।

फर्जी कॉलेजों पर लगेगी लगाम

सरकार का दावा है कि इन बदलावों से फर्जी और कम गुणवत्ता वाले शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों पर रोक लगेगी। अब केवल वही कॉलेज शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स चला सकेंगे, जो NCTE के मानकों और आधुनिक सुविधाओं को पूरा करेंगे। नई व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा जरूर बढ़ेगी, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक शिक्षक बनने की न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड B.Ed (ITEP) हो, ताकि स्कूलों को बेहतर प्रशिक्षित शिक्षक मिल सकें और आने वाली पीढ़ी को मजबूत शैक्षणिक आधार मिल सके।