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शूल और सिद्ध योग के बीच योगिनी एकादशी, भगवान विष्णु की आराधना से बरसेगी कृपा, इस काम को करने से खुलेंगे मोक्ष के द्वार

Yogini Ekadashi: हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा, व्रत और दान करने से भक्तों को श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ...

Yogini Ekadashi
शूल और सिद्ध योग के बीच योगिनी एकादशी- फोटो : social Media

Yogini Ekadashi: हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा, व्रत और दान करने से भक्तों को श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर आज शुक्रवार को योगिनी एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। स बार योगिनी एकादशी पर शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का आरंभ होगा। इसके साथ ही शूल योग और सिद्ध योग का भी निर्माण हो रहा है। धर्माचार्यों के अनुसार सिद्ध योग में भगवान विष्णु की आराधना और धार्मिक अनुष्ठान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

इस बार योगिनी एकादशी का व्रत गृहस्थ श्रद्धालु आज रखेंगे, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी और साधु-संत शनिवार 11 जुलाई को एकादशी व्रत करेंगे। मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने और भगवान श्रीहरि की पूजा-अर्चना करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है।धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी भगवान नारायण की आराधना का विशेष दिन है। इस दिन व्रत रखने के बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, रामचरितमानस का पाठ और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने से भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।मान्यता है कि योगिनी एकादशी के प्रभाव से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है। भक्तों को सांसारिक सुखों के साथ अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मार्कण्डेय ऋषि द्वारा वर्णित हेममाली और कुबेर की कथा में योगिनी एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान पुण्डरीकाक्ष की पूजा करने और अभिषेक जल से शरीर का मार्जन करने से रोगों से मुक्ति और आरोग्यता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

श्रद्धालु इस दिन पीतांबर धारी भगवान विष्णु की पूजा कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हैं। मान्यता है कि इससे ऐश्वर्य, स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।योगिनी एकादशी पर दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन गोदान, वस्त्रदान, छाता, जूता, फल, सत्तू, सुपारी, जनेऊ, जल से भरा घड़ा और पंखा आदि का दान शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और भक्तों को करोड़ों गौदान के समान फल मिलता है।

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