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Supreme Court: CJI का रौद्र रूप! NCERT के सिलेबस पर क्यों आगबबूला हुए चीफ जस्टिस, जानिए पूरा मामला

Supreme Court: देश की शिक्षा व्यवस्था और न्यायपालिका के बीच एक बड़ी रार छिड़ गई है। NCERT के नए सिलेबस में न्यायपालिका को लेकर शामिल की गई कुछ विवादित जानकारियों पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सख्त नाराजगी जताई है।

सुप्रीम कोर्ट
NCERT पर भड़के CJI - फोटो : social media

Supreme Court: NCERT के नए सिलेबस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। दरअसल, एनसीईआरटी की नई कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और लंबित मामलों को लेकर शामिल अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस कदम पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि वे किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे। पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि पाठ्यपुस्तक का यह हिस्सा संविधान के ‘बेसिक स्ट्रक्चर’ के विपरीत प्रतीत होता है।

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

बुधवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष कहा कि कक्षा 8 के छात्रों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि, मुख्य न्यायाधीश के तौर पर मैंने संज्ञान लिया है। यह एक सोचा-समझा कदम लगता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। कृपया कुछ दिन इंतजार करें। बार और बेंच दोनों चिंतित हैं। मैं इस मामले को स्वयं देखूंगा। कानून अपना काम करेगा।

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किताब में क्या है?

एनसीईआरटी की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक के ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक अध्याय में न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या और न्यायाधीशों की कमी न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। पुस्तक में यह भी लिखा गया है कि न्यायाधीश आचार संहिता से बंधे होते हैं और न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

लंबित मामलों का जिक्र

किताब में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके अनुसार उच्चतम न्यायालय में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं। उच्च न्यायालयों में करीब 62.40 लाख मामले लंबित हैं। जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 4.70 करोड़ मामले लंबित बताए गए हैं। पुस्तक में पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई के एक बयान का भी उल्लेख है, जिसमें उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाएं जनता के भरोसे को प्रभावित करती हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर विस्तृत विचार कर रहा है। आने वाले दिनों में इस अध्याय को लेकर कोई निर्देश या टिप्पणी सामने आ सकती है।

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