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संसद में गूंजी संजय यादव की दहाड़: 'बीमारी कैंसर है और सरकार सिरदर्द का इलाज कर रही है'; विनियोग विधेयक पर एनडीए को घेरा

राजद सांसद संजय यादव ने राज्यसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार को 'अमीरों की हमदर्द' और 'गरीबों की शोषक' बताया।

संसद में गूंजी संजय यादव की दहाड़: 'बीमारी कैंसर है और सरकार

Patna - राजद सांसद संजय यादव ने राज्यसभा में विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की धज्जियां उड़ाईं। उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि सरकार का बजट और विनियोग केवल "आंकड़ों का अखाड़ा" है, जहां हमेशा गरीब को पटखनी दी जाती है और अमीरों के लिए रेड कारपेट बिछाया जाता है। यादव ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहर से शोर तो बहुत कर रही है, लेकिन अंदर से पूरी तरह खोखली हो चुकी है।

"बीमारी कैंसर, इलाज सिरदर्द का": सरकार पर तंज

संजय यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, "मोदी सरकार चींटी पर तोप चला रही है। देश को बेरोजगारी और महंगाई का कैंसर है, लेकिन सरकार केवल सिरदर्द का इलाज कर रही है।" उन्होंने आगे कहा कि देश को '56 इंची सीना' नहीं, बल्कि एक 'मजबूत रीढ़ की हड्डी' चाहिए जो किसी के सामने झुके नहीं और जनता के हितों के लिए खड़ी हो सके।

अमीरों की कर्ज माफी और गरीबों पर लाठी

सांसद ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई गरीब 5-10 हजार का लोन लेता है और उसकी ईएमआई (EMI) बाउंस हो जाती है, तो बैंक लाठी-डंडा लेकर उसकी इज्जत तार-तार कर देते हैं। वहीं दूसरी ओर, सरकार के 'लाड़ले' उद्योगपति हजारों करोड़ रुपये डकार कर विदेश फुर्र हो जाते हैं और सरकार उनका लोन माफ कर देती है। उन्होंने पूछा कि क्या एनडीए सरकार की सारी बहादुरी सिर्फ कमजोर लोगों के लिए ही सुरक्षित है?

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महंगाई और बेरोजगारी के आंकड़ों पर घेरा

संजय यादव ने 2014 और 2026 की तुलना करते हुए सरकार से कई तीखे सवाल पूछे:

  • 2014 में बेरोजगारी दर क्या थी और आज 2026 में क्या है?

  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में पिछले 10 वर्षों में 35 फीसदी की गिरावट क्यों आई?

  • 2014 के मुकाबले पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस, दाल और सब्जियों की कीमतें आसमान क्यों छू रही हैं?

  • रेल-बस के किराए और स्कूल-कॉलेज की फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी पर सरकार चुप क्यों है?


  • बाजार में सन्नाटा और मध्यम वर्ग की आर्थिक तंगी

सांसद ने अर्थव्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि अब तो साबुन-शैंपू बनाने वाली कंपनियां भी मान रही हैं कि उनकी बिक्री घट गई है। मिडिल क्लास के सामने आर्थिक चुनौतियां गंभीर हैं और लोग अपनी छोटी जरूरतों के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। उन्होंने फिनटेक बारोमीटर रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में लोग 10 हजार का लोन तक चुकाने की स्थिति में नहीं हैं, जो आर्थिक तंगी का सबसे भयावह संकेत है।

Report - Ranjan kumar