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NCERT Book Controversy: सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT का बड़ा यू-टर्न, बिकी हुई किताबें बुलाई वापस, CJI के गुस्से से हड़कंप

NCERT Book Controversy: NCERT ने सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगने के बाद सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी है। सीजेआई के गस्से के बाद आनन फानन में एनसीआरटी ने ना सिर्फ बुक की बिक्री पर रोक लगा दी है बल्कि बिकी हुई किताबें भी वापस बुला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट
NCERT का यू-टर्न- फोटो : social media

NCERT Book Controversy:  सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद NCERT ने बड़ा यू-टर्न ले लिया है। एनसीआरटी ना सिर्फ माफी मांगी है बल्कि बिकी हुई किताबों को भी वापस बुला लिया है। दरअसल, कक्षा 8 की सोशल साइंस की नई किताब में ‘ज्यूडिशियरी में करप्शन’ से जुड़े अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद NCERT ने बड़ा फैसला लिया है। संस्था ने विवादित चैप्टर को हटाने की घोषणा की है और अपनी गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।

NCERT ने मांगी माफी 

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। बुधवार को सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। इसके बाद देर रात NCERT ने बयान जारी कर खेद व्यक्त किया और कहा कि अनजाने में अनुचित सामग्री शामिल हो गई थी।

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24 फरवरी को जारी हुई थी नई किताब

NCERT ने 24 फरवरी 2026 को कक्षा 8 के लिए ‘Exploring Society: India and Beyond, Vol II’ नामक सोशल साइंस भाग-2 की पुस्तक जारी की थी। पुस्तक के अध्याय 4 ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ (पेज 125-142) में न्यायपालिका से जुड़ी चुनौतियों, लंबित मामलों और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। किताब के प्रकाशन के बाद इस सामग्री को लेकर विवाद शुरू हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा विषय बताया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक सोची-समझी कार्रवाई प्रतीत होती है और इससे सख्ती से निपटा जाएगा। मामले पर आज फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

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शिक्षा मंत्रालय ने भी लगाई रोक

विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पुस्तक के वितरण पर अगले आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए। NCERT ने इस आदेश का पालन करते हुए किताब की बिक्री और वितरण तत्काल प्रभाव से रोक दिया। संस्था ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह न्यायपालिका को भारतीय संविधान का रक्षक और मौलिक अधिकारों का संरक्षक मानती है तथा उसका किसी संवैधानिक संस्था की गरिमा कम करने का कोई इरादा नहीं था।

दोबारा लिखा जाएगा विवादित चैप्टर

NCERT ने कहा है कि संबंधित अध्याय को विशेषज्ञों और प्राधिकृत संस्थाओं से सलाह लेकर दोबारा लिखा जाएगा। संशोधित पुस्तक शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी। संस्था के अनुसार नई किताबों का उद्देश्य छात्रों में संविधान की समझ बढ़ाना, संस्थाओं के प्रति सम्मान विकसित करना और लोकतांत्रिक भागीदारी के बारे में सही जानकारी देना है।

चैप्टर में क्या था?

विवादित अध्याय में न्यायालयों की संरचना और भूमिका के साथ-साथ न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों का उल्लेख किया गया था। इसमें लंबित मामलों की संख्या, न्यायाधीशों की कमी और भ्रष्टाचार को भी एक चुनौती के रूप में पेश किया गया था। पुस्तक के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81 हजार, उच्च न्यायालयों में 62.40 लाख और जिला व अधीनस्थ न्यायालयों में 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं। साथ ही न्यायपालिका की आंतरिक जवाबदेही प्रणाली और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण तंत्र (सीपीग्राम्स) का भी जिक्र किया गया था। अध्याय में पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई के एक बयान का भी उल्लेख था, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आवश्यक बताया गया था।