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अब 'केरल' नहीं कहलाएगा यह दक्षिण भारतीय राज्य, मोदी सरकार ने नाम बदलने के प्रस्ताव को दी मंजूरी; जानें क्या होगा अब नया नाम?

केरल विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। मंगलवार को हुई यूनियन कैबिनेट की मीटिंग में केरल का नाम बदलने के प्रस्ताव को संवैधानिक स्वीकृति दे दी गई है।

अब 'केरल' नहीं कहलाएगा यह दक्षिण भारतीय राज्य, मोदी सरकार ने

New Delhi -: नई दिल्ली के 'सेवा तीर्थ' स्थित नवनिर्मित पीएमओ बिल्डिंग में मंगलवार को आयोजित पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक ऐतिहासिक फैसलों की गवाह बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने केरल सरकार के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'केरलम' करने की मांग की गई थी।

नई PMO बिल्डिंग 'सेवा तीर्थ' में पहली बैठक और बड़ा फैसला

मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक कई मायनों में खास रही। एक तरफ जहां सरकार ने नई पीएमओ बिल्डिंग 'सेवा तीर्थ' में अपनी पहली औपचारिक बैठक की, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य केरल के नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी देकर एक बड़ा संदेश दिया। यह फैसला आगामी अप्रैल-मई में होने वाले केरल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लिया गया है, जिसे राजनीतिक गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विजयन की मुहिम रंग लाई

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लंबे समय से राज्य का नाम 'केरलम' करने की वकालत कर रहे थे। उनका तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य को 'केरलम' ही कहा जाता है और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही मलयालम भाषी समुदायों के लिए 'संयुक्त केरलम' बनाने की मांग उठती रही है। मुख्यमंत्री के इसी विजन को अब केंद्र सरकार ने संवैधानिक रूप से स्वीकार कर लिया है।

दो बार पास हुआ था विधानसभा में प्रस्ताव

केरल विधानसभा ने इस संबंध में 24 जून, 2024 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था। इससे पहले अगस्त 2023 में भी ऐसा ही प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसमें कुछ तकनीकी (Technical) बदलावों के सुझाव दिए थे। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने संशोधित प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब कैबिनेट ने अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है।

संविधान की 8वीं अनुसूची में होगा बदलाव

इस मंजूरी के बाद अब केंद्र सरकार संविधान के पहले शेड्यूल (First Schedule) और आठवीं अनुसूची (Eighth Schedule) में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम 'केरल' से बदलकर 'केरलम' करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सीएम विजयन ने सदन में कहा था कि आधिकारिक दस्तावेजों में अब राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी जाएगी।

चुनावी राजनीति और 'केरलम' कार्ड

विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जहाँ एलडीएफ (LDF) सरकार इसे अपनी सांस्कृतिक जीत के रूप में पेश करेगी, वहीं केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार कर क्षेत्रीय अस्मिता के प्रति अपने सम्मान को प्रदर्शित किया है। अब देखना यह होगा कि इस नाम परिवर्तन का चुनावी नतीजों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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