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रेलवे क्लेम की प्रक्रिया हुई 'स्मार्ट': अब घर बैठे ऑनलाइन दर्ज करें दावा, दफ्तरों के चक्करों से यात्रियों को मिली आजादी!

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लॉन्च किए गए नए e-RCT सिस्टम के तहत अब रेल दुर्घटना या अन्य दावों के लिए पीड़ितों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इस सुधार का मुख्य उद्देश्य क्लेम की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और पूरी तरह कागज रहित ब

रेलवे क्लेम की प्रक्रिया हुई 'स्मार्ट': अब घर बैठे ऑनलाइन दर

New Delhi - : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने e-RCT सिस्टम लॉन्च कर रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। अब यात्री दुर्घटना या अन्य क्लेम के लिए 24×7 ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और रियल-टाइम ट्रैकिंग के जरिए अपने केस की स्थिति जान सकेंगे।

डिजिटल क्रांति: अब 24 घंटे उपलब्ध होगी ई-फाइलिंग की सुविधा

भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत देते हुए रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लॉन्च किए गए नए e-RCT सिस्टम के तहत अब पीड़ितों को क्लेम दर्ज कराने के लिए भौतिक रूप से ट्रिब्यूनल जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यात्री अब साल के किसी भी दिन और किसी भी समय (24×7) ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना दावा दर्ज कर सकते हैं।

हाइब्रिड सुनवाई और रियल-टाइम अपडेट

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारदर्शिता है। अब केस दर्ज होने के बाद यात्रियों को SMS और ई-मेल के जरिए तुरंत जानकारी दी जाएगी। साथ ही, ट्रिब्यूनल में 'हाइब्रिड हियरिंग' (ऑनलाइन सुनवाई) का विकल्प दिया गया है, जिससे केस की पैरवी कहीं से भी की जा सकेगी। पीड़ित पक्ष अपने केस की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर सकेंगे और कोर्ट के फैसलों को तुरंत ऑनलाइन डाउनलोड कर पाएंगे।

12 महीनों में पूरे देश में लागू होगा सिस्टम

सरकार ने इस सुधार को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अगले 12 महीनों के भीतर देश की सभी 23 रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल बेंचों को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया जाएगा। इस कदम से न केवल पुराने लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि वकीलों और आम यात्रियों के समय और धन की भी भारी बचत होगी।

नवाचार के साथ सुरक्षा पर भी जोर

e-RCT के साथ-साथ रेलवे ने 'रेल टेक पॉलिसी' के माध्यम से सुरक्षा को भी डिजिटल तकनीक से जोड़ने का फैसला किया है। इसके तहत AI आधारित फायर डिटेक्शन, ड्रोन से पटरियों की निगरानी और कोहरे में बाधाओं को पहचानने वाली प्रणालियों को रेलवे बेड़े में शामिल किया जाएगा। यह यात्रियों के लिए सफर को सुरक्षित और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।




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