LATEST NEWS

  • Daroga Prasad Rai 104th Birth Anniversary
  • सारण की माटी से बिहार की सत्ता के शिखर तक पहुंचे दारोगा बाबू, 104वीं जयंती पर याद किया

  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त  को किया गिरफ्तार
  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त

  • Saran Flood News
  • Saran Flood News: गंगा, सरयू, सोन और गंडक के उफान से छपरा के कई पंचायतों का संपर्क टूटा

  •  ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके द्वार’
  • बिहार के 6 करोड़ लोगों की होगी स्वास्थ्य जाँच, निशांत की अपील- ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके

  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया पलायन, एसडीएम ने लिया स्थिति का जायजा
  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया

Bihar EOU: नस पर EOU के वार से तिलमिलाए माफिया, 256 कुख्यातों की तोड़ दी कमर,पेपर लीक से गोल्ड रॉबरी तक के अपराधियों पर कसा शिकंजा

Bihar EOU: बिहार में संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और काली कमाई के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है।

Bihar EOU
माफिया की नस पर EOU का वार- फोटो : social Media

Bihar EOU: बिहार में संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और काली कमाई के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। अब आर्थिक अपराध के बड़े मामलों की जांच सिर्फ पटना मुख्यालय तक सीमित नहीं रहेगी। बिहार पुलिस के सभी 12 रेंज में EOU के विशेष सेल बनाए जा रहे हैं और राज्य के हर जिले में एक-एक EOU इंस्पेक्टर की तैनाती की जा चुकी है।इस नई रणनीति का मकसद सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजना नहीं, बल्कि उनके आर्थिक साम्राज्य की जड़ पर प्रहार करना है। पेपर लीक से लेकर जमीन माफिया, संगठित गिरोह और काली कमाई से बनाई गई बेनामी संपत्ति तक अब EOU की निगाह रहेगी।

EOU के ADG डॉ. अमित कुमार जैन के मुताबिक, काली कमाई के जरिए अकूत संपत्ति खड़ी करने वाले 256 कुख्यात अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ PMLA के तहत कार्रवाई का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भेजा गया है।अकेले इस साल 12 जून के बाद से अब तक 10 बड़े अपराधियों के खिलाफ प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। इन मामलों में जांच एजेंसी को करीब 108 करोड़ 93 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मिलने का दावा किया गया है।यानी बिहार पुलिस की रणनीति अब अपराध की कमाई तक पहुंचने की है। अपराधी जेल में चला जाए और उसका नेटवर्क बाहर से चलता रहे—इस पुराने मॉडल को तोड़ने के लिए आर्थिक नाकेबंदी को हथियार बनाया जा रहा है।

Diarch GO

EOU की हालिया कार्रवाई ने इस रणनीति की तस्वीर भी सामने रखी है। नालंदा के कथित जमीन माफिया संतोष डाउन के 25 ठिकानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान 27 लाख रुपये नकद और जमीन से जुड़े 75 डीड बरामद किए जाने की बात कही गई है।वहीं जमुई के गुड्डू यादव के खिलाफ कार्रवाई में 34.19 लाख रुपये नकद, 131 जमीन के डीड और अंचल कार्यालय के सरकारी रजिस्टर बरामद किए जाने का दावा है।जमीन के कागजात और सरकारी रिकॉर्ड की बरामदगी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित तौर पर जमीन के कारोबार में किन लोगों की भूमिका थी और सरकारी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।

EOU की नई रणनीति में परीक्षा माफिया भी निशाने पर हैं। पेपर लीक मामले में चर्चित संजीव मुखिया और गोल्ड रॉबरी किंग के नाम से चर्चित सुबोध सिंह की संपत्ति जब्त करने की तैयारी की जा रही है।यह संकेत साफ है कि जांच एजेंसी अपराध से अर्जित संपत्ति को सिर्फ कागजों पर दर्ज करने के बजाय उसे जब्त और नीलाम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।बिहार की नेपाल और पश्चिम बंगाल से लगती सीमाओं पर तस्करी और आर्थिक अपराधों पर नजर रखने के लिए 8 जिलों के 14 पुलिस अनुमंडलों में बॉर्डर इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट बनाई गई है।सीमा क्षेत्र में नकली नोट, तस्करी, फर्जीवाड़े और दूसरे आर्थिक अपराधों से जुड़े नेटवर्क पर स्थानीय स्तर से खुफिया जानकारी जुटाने और कार्रवाई करने की तैयारी है।इसके अलावा नकली सामान और ब्रांड के नाम पर होने वाले अपराधों पर शिकंजा कसने के लिए बौद्धिक संपदा अपराध शाखा भी बनाई गई है।

NSIT
Nsmch

EOU के विशेष सेल बिहार के सभी 12 पुलिस रेंज में बनाए जाएंगे—सेंट्रल, मगध, शाहाबाद, तिरहुत, चंपारण, सारण, मिथिला, कोशी, पूर्णिया, पूर्वी, मुंगेर और बेगूसराय।इसके साथ अवैध संपत्ति की जब्ती और नीलामी के लिए अलग सेल बनाने की योजना है। यानी जांच से लेकर संपत्ति कुर्की और उसके निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है।बिहार पुलिस की नई रणनीति का मूल मंत्र सीधा है अपराधी को सिर्फ जेल भेजना काफी नहीं, उसकी फंडिंग लाइन काटनी होगी।किसी गिरोह की ताकत उसके हथियारों और गुर्गों से जितनी बनती है, उससे कहीं ज्यादा उसकी आर्थिक क्षमता से बनती है। पैसा बंद हुआ तो जमीन कब्जाने, रंगदारी वसूलने, फर्जीवाड़ा करने और नेटवर्क चलाने की ताकत भी कमजोर होगी।

EOU का रेंज स्तर तक विस्तार इसी सोच का हिस्सा है। स्थानीय स्तर पर इंस्पेक्टर और विशेष सेल होने से जमीन माफिया, पेपर लीक नेटवर्क और आर्थिक अपराधियों की गतिविधियों की जानकारी जल्दी जुटाई जा सकेगी।अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि यह नया तंत्र सिर्फ छापेमारी और संपत्ति जब्ती तक सीमित रहता है या बिहार में संगठित अपराध की पूरी आर्थिक रीढ़ तोड़ने में कामयाब होता है।