LATEST NEWS

  • Daroga Prasad Rai 104th Birth Anniversary
  • सारण की माटी से बिहार की सत्ता के शिखर तक पहुंचे दारोगा बाबू, 104वीं जयंती पर याद किया

  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त  को किया गिरफ्तार
  • पटना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 24 घंटे में हत्या के प्रयास समेत विभिन्न मामलों में आरोपी 48 अभियुक्त

  • Saran Flood News
  • Saran Flood News: गंगा, सरयू, सोन और गंडक के उफान से छपरा के कई पंचायतों का संपर्क टूटा

  •  ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके द्वार’
  • बिहार के 6 करोड़ लोगों की होगी स्वास्थ्य जाँच, निशांत की अपील- ‘जांच एवं उपचार - चिकित्सा आपके

  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया पलायन, एसडीएम ने लिया स्थिति का जायजा
  • Bihar News : कैमूर में दुर्गावती नदी के उफान से कई गांवों में घुसा पानी, ग्रामीणों ने किया

Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट और साइबर लूट बन रही महामारी, तकनीकी छलावे अदृश्य साम्राज्य से कैसे बचें, पढ़िए

Cyber Fraud: संयुक्त राष्ट्र की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में एशिया प्रशांत क्षेत्र के नागरिकों को साइबर अपराधियों ने 114 अरब डॉलर का भारी-भरकम चूना लगाया है।

Digital Arrest and Cyber Fraud Crisis
डिजिटल अरेस्ट और साइबर लूट बन रही महामारी- फोटो : social Media

Cyber Fraud: सियासत और व्यवस्था के गलियारों में आज साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी का मुद्दा किसी महामारी से कम खतरनाक नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में एशिया प्रशांत क्षेत्र के नागरिकों को साइबर अपराधियों ने 114 अरब डॉलर का भारी-भरकम चूना लगाया है। साफ है कि अपराधियों ने भौगोलिक सरहदों को नेस्तनाबूद कर एक ऐसा समानांतर आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर दिया है, जो सीधे तौर पर देश की वित्तीय सुरक्षा और आम अवाम के सुकून पर एक बड़ा आघात है।

आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बेजा इस्तेमाल कर ये शातिर लोग डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी निवेश और विदेशों में नौकरी के लुभावने सब्जबाग दिखाकर मासूम नागरिकों को लुटने में लगे हैं। भारत भी इस भीषण संकट से अछूता नहीं है। 

Diarch GO

संसद में पेश आंकड़ों के गवाह हैं कि साल 2024 में भारतीयों ने विभिन्न साइबर घोटालों में 22,845 करोड़ रुपये गंवा दिए और इस दौरान करीब 22 लाख साइबर अपराध दर्ज किए गए। खासकर बुजुर्गों और सेवानिवृत्त अधिकारियों की जीवनभर की खून-पसीने की कमाई इन डिजिटल ठगों के निशाने पर रहती है, क्योंकि पुरानी पीढ़ी अक्सर आधुनिक डिजिटल दुनिया की जटिलताओं को नहीं भांप पाती।

सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर खतरे का संज्ञान लेते हुए बिल्कुल सही सुझाव दिया है कि आपराधिक कानूनों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ को औपचारिक रूप से परिभाषित किया जाए और इसे कड़ी सजा वाले एक अलग जुर्म के तौर पर शुमार किया जाए। डिजिटल अरेस्ट के इन मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसियों या अदालत के नुमाइंदे बताकर वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ितों को इस कदर खौफज़दा कर देते हैं कि वे डर के साए में अपनी सारी जमा-पूंजी इन ठगों के हवाले कर बैठते हैं। विडंबना यह है कि बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय नियामक संस्थाएं इस आधुनिक लूट को रोकने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पा रही हैं।

NSIT
Nsmch

जरूरत इस बात की है कि महज़ सतही कार्रवाई से काम न चलाया जाए, बल्कि एक मजबूत कानूनी ढांचा, त्वरित कार्रवाई तंत्र और बड़े पैमाने पर सामूहिक जन-जागरूकता का अभियान छेड़ा जाए। जब तक अपराधियों में कानून का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा खतरे में ही रहेगी।