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ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर, ‘गोट मैन’ संजीव कुमार की अनूठी पहल से 50 हजार पशुपालक परिवारों की बदली किस्मत

ग्रामीण भारत की महिलाओं के हाथों में अब सिर्फ चूल्हा-चौका ही नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक की कमान भी आ चुकी है। इस बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव रखी है ‘The Goat Trust’ ने, जिसने SBI Foundation और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर ‘डिजिटल लाइवस

ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर, ‘गोट मैन’ संजीव कुमार की अनूठी

पूर्णिया: ग्रामीण भारत की महिलाओं के हाथों में अब सिर्फ चूल्हा-चौका ही नहीं, बल्कि डिजिटल तकनीक की कमान भी आ चुकी है। इस बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव रखी है ‘The Goat Trust’ ने, जिसने SBI Foundation और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ मिलकर ‘डिजिटल लाइवस्टॉक फार्मर स्कूल’ (DLFS) कार्यक्रम का पांच राज्यों में विस्तार किया है। यह पहल ग्रामीण आजीविका के पारंपरिक तौर-तरीकों को आधुनिकता का नया रंग दे रही है। इस अनूठे अभियान के तहत अब तक देश के ग्रामीण इलाकों में 500 डिजिटल लाइवस्टॉक फार्मिंग स्कूल सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के जरिए 50 हजार से भी अधिक पशुपालक परिवारों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि की नई किरण पहुंची है।

प्लान का मुख्य फोकस

 कार्यक्रम का मुख्य फोकस ग्रामीण पशुपालकों, विशेषकर महिलाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़कर उन्हें आधुनिक और वैज्ञानिक पशुपालन तकनीकों में माहिर बनाना है, जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। DLFS मॉडल की सबसे खूबसूरत बात इसकी सादगी और पहुंच है। हर गांव में प्रत्येक 15 दिनों पर किसानों के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इन केंद्रों पर अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाता है, जहां एंड्रॉयड मोबाइल, प्रोजेक्टर, हाई-स्पीड इंटरनेट और गांव की ही प्रशिक्षित महिला फैसिलिटेटर की मदद से ऑडियो-विजुअल (दृश्य-श्रव्य) सामग्री के जरिए बहुत ही सरल अंदाज में प्रशिक्षण दिया जाता है।

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क्या है मॉडल?

पशुपालकों को कुशल बनाने के लिए 24 महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसमें नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, बेहद कम लागत वाला पौष्टिक चारा तैयार करना, समय पर टीकाकरण, पारंपरिक हर्बल उपचार, आधुनिक हाइड्रोपोनिक्स चारा तकनीक, पशु बीमा, लाभकारी सरकारी योजनाएं, मीट बैंक और पशु आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों (Value-added products) के निर्माण जैसे जमीन से जुड़े विषय शामिल हैं।

इस मॉडल के जरिए किसान अपने-अपने फार्म पर किए गए छोटे-छोटे सूक्ष्म प्रयोगों को एक-दूसरे के साथ साझा कर रहे हैं। इससे गांव के स्तर पर ही नवाचार (Innovation) और सामूहिक सीख की एक मजबूत संस्कृति विकसित हो रही है। किसान जब खुद दूसरे किसान के फार्म पर जाकर उसकी सफलता की कहानी देखते हैं, तो उनका हौसला और भरोसा दोगुना हो जाता है।

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 नेतृत्व और चुनौतियों पर विजय

इस पूरे कार्यक्रम की जो सबसे मजबूत कड़ी है, वह है महिला नेतृत्व। प्रत्येक DLFS केंद्र का संचालन स्थानीय शिक्षित महिलाओं के हाथों में सौंपा गया है। इसकी वजह से ग्रामीण महिलाओं को एक सुरक्षित और सहज वातावरण मिल रहा है, जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी स्थानीय भाषा और अपनी सुविधा के अनुसार तकनीक को सीख और समझ पा रही हैं। यह भागीदारी ग्रामीण समाज में महिलाओं की भूमिका को एक नई ताकत दे रही है। ‘द गोट ट्रस्ट’ के संस्थापक गोट मैन प्रो. संजीव कुमार ने इस विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल रूखी-सूखी जानकारी देना नहीं है, बल्कि गांवों में एक ऐसा जीवंत और सुरक्षित सीखने का वातावरण तैयार करना है जहां महिलाएं अपनी भाषा और अपनी फुर्सत के समय के अनुसार तकनीक सीख सकें।

डिजिटल तकनीक का सहारा 

गोट मैन प्रो. संजीव कुमार का दृढ़ विश्वास है कि डिजिटल तकनीक और सामूहिक सीख के इस बेजोड़ संगम के माध्यम से पशुपालन को अब “गरीबी के काम” के ठप्पे से बाहर निकालकर एक “सम्मानजनक उद्यम में बदला जा सकता है। दरअसल, इस DLFS मॉडल ने ग्रामीण क्षेत्रों की उन बड़ी दीवारों को ढहा दिया है जो विकास के रास्ते में रोड़ा बनी हुई थीं। स्मार्टफोन और इंटरनेट की कमी, भाषा की पेचीदगी, पारंपरिक पुरुष वर्चस्व, सुरक्षित प्रशिक्षण स्थलों का न होना और आपस में मिलकर सीखने की कमी जैसी चुनौतियों को इस मॉडल ने बहुत ही समझदारी से दूर किया है। यही वजह है कि आज गांवों में समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं का उपयोग, उन्नत हरा चारा उत्पादन और लाइवस्टॉक क्रेडिट कार्ड जैसी आधुनिक और सरकारी सहूलियतों का लाभ उठाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है।

एक लाख परिवारों तक जाने का संकल्प

सफलता के इस सफर को ‘द गोट ट्रस्ट’ यहीं रोकने वाली नहीं है। संस्था ने अगले दो वर्षों के भीतर 1,000 नए DLFS केंद्रों की स्थापना के माध्यम से एक लाख पशुपालक परिवारों तक सीधे पहुंचने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दूरदर्शी विजन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए संस्था अब इस पूरे मॉडल को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), पशुपालन विभाग और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के साथ जोड़ने जा रही है, ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन का रूप दिया जा सके। निश्चित रूप से, गोट मैन प्रो. संजीव कुमार और उनकी टीम का यह प्रयास ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की कहानी में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख रहा है।