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Britannia biscuits: चीनी की महंगाई का मीठा नहीं कड़वा असर! महंगे हो सकते हैं बिस्किट और चॉकलेट

Britannia biscuits: चीनी की बढ़ती कीमतों से बिस्किट, चॉकलेट और दूसरी मीठी चीजें महंगी हो सकती हैं। गोल्डमैन साच्स के मुताबिक ब्रिटानिया पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।

Britannia biscuits

Britannia biscuits: चाय के साथ बिस्किट खाना पसंद करने वालों के लिए आने वाले दिनों में जेब पर थोड़ा ज्यादा असर पड़ सकता है। चीनी की कीमत बढ़ने से बिस्किट, चॉकलेट, मिठाई और दूसरी मीठी चीजें बनाने वाली कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर आगे चलकर इन सामानों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

गोल्डमैन साच्स के अनुसार, चीनी की बढ़ती कीमतों का असर सबसे ज्यादा ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज पर पड़ सकता है। कंपनी के कई उत्पाद कम कीमत वाले छोटे पैक में बिकते हैं। ऐसे में बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों पर डालना कंपनी के लिए आसान नहीं होगा।

ब्रिटानिया पर ज्यादा असर क्यों पड़ सकता है?

गोल्डमैन साच्स के मुताबिक ब्रिटानिया के कुल खर्च में चीनी और पाम ऑयल की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। अगर चीनी के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं तो कंपनी की लागत बढ़ सकती है और उसके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

गोल्डमैन साच्स ने ब्रिटानिया के शेयर को Neutral रेटिंग दी है और इसके लिए 6,000 रुपये का टारगेट प्राइस रखा है। नेस्ले इंडिया और वरुण बेवरेजेज पर भी महंगी चीनी का असर पड़ सकता है, लेकिन इनके लिए असर Britannia की तुलना में कम रहने का अनुमान है।

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त्योहारों से बढ़ी चीनी की मांग

भारत में अगस्त से नवंबर तक त्योहारों का सीजन रहता है। गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई और दूसरी मीठी चीजों की मांग बढ़ जाती है। इससे चीनी की मांग भी बढ़ती है और कीमतों पर दबाव आ सकता है। बताई गई जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 10 फीसदी बढ़े हैं। कम बारिश और सूखे मौसम का असर गन्ने की फसल पर पड़ने की बात भी सामने आई है।

विदेशों में भी सप्लाई की चिंता

ब्राजील में मौसम की वजह से गन्ने की कटाई पर असर पड़ा है। इसके अलावा वहां गन्ने का इस्तेमाल चीनी के साथ-साथ एथेनॉल बनाने में भी हो रहा है। इससे चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है। थाईलैंड और भारत में भी चीनी उत्पादन को लेकर दबाव रहने का अनुमान है। यूरोप और ब्रिटेन में गर्म मौसम ने भी फसल को प्रभावित किया है।

सरकार की नजर चीनी के स्टॉक पर

सरकार ने चीनी के स्टॉक को लेकर डीलरों पर भी नियम लागू किए हैं। बिस्किट और ब्रेड बनाने वाली कंपनियों से तय सीमा से ज्यादा रखी गई चीनी का स्टॉक 31 अगस्त तक बेचने को कहा गया है। इसका मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है। हालांकि, कंपनियों के सामने एक और परेशानी है। अगर वे अभी अपना स्टॉक बेच देती हैं और बाद में बाजार से चीनी खरीदती हैं, तो उन्हें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसे में आने वाले समय में चीनी की कीमतों का असर बिस्किट और दूसरी मीठी चीजों पर कितना पड़ता है, यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।