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महँगाई का अलार्म हो गया ऑन, रुपया लुढ़कने से बाजार में हाहाकार, डॉलर के सामने ऐतिहासिक गिरावट

Rupee Fall 2026: भारतीय रुपया अमेरिकी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया।....

Rupee Plunges to Record Low vs Dollar Inflation Fears Surge
महँगाई का अलार्म हो गया ऑन- फोटो : X

Rupee Fall 2026: भारतीय फाइनेंशियल मार्केट में सोमवार का कारोबारी दिन भारी उतार-चढ़ाव और बेचैनी के साथ गुजर रहा है, भारतीय रुपया अमेरिकी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.89 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया। यह गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इकोनॉमी के लिए एक बड़ा ‘रेड सिग्नल’ मानी जा रही है, जिसने निवेशकों और पॉलिसी मेकर्स दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस करंसी क्राइसिस के पीछे सबसे बड़ा फैक्टर पश्चिम एशिया में जारी जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें हैं। ग्लोबल ऑयल मार्केट में क्रूड की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर मुल्क पर सीधा असर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल इम्पोर्ट करता है और इसकी पेमेंट डॉलर में होती है, लिहाज़ा डॉलर की डिमांड बढ़ते ही रुपये पर दबाव और गहरा हो जाता है।

कमोडिटी और करेंसी मार्केट के जानकारों का कहना है कि बढ़ता आयात बिल और डॉलर की मजबूती, दोनों मिलकर रुपये को लगातार कमजोर कर रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FII) का भारतीय इक्विटी मार्केट से पैसा निकालना भी इस गिरावट को तेज कर रहा है। जब निवेशक अपना निवेश निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में कन्वर्ट करते हैं, जिससे सप्लाई-डिमांड का बैलेंस बिगड़ जाता है।

दूसरी ओर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 4.4 फीसदी के पार पहुंचने से ग्लोबल निवेशक वहां शिफ्ट हो रहे हैं, जहां उन्हें ज्यादा रिटर्न और सुरक्षा दोनों मिल रही है। इस ट्रेंड ने उभरते बाजारों की करेंसी, खासकर रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। इस गिरावट का असर सिर्फ फॉरेक्स मार्केट तक सीमित नहीं है। कमजोर रुपया सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा देता है ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंडस्ट्रियल इनपुट महंगे हो जाते हैं, जिसका बोझ आम उपभोक्ता और उद्योग दोनों पर पड़ता है।

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भारतीय रिज़र्व बैंक ने बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने की कोशिश की है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक क्रूड प्राइस और जियो-पॉलिटिकल हालात काबू में नहीं आते, रुपये की कमजोरी बरकरार रह सकती है।

आने वाले दिनों में रुपया 94 से 95 के दायरे में ट्रेड कर सकता है, जो यह साफ संकेत देता है कि मौजूदा गिरावट कोई अस्थायी झटका नहीं, बल्कि एक बड़े ग्लोबल इकनॉमिक साइकिल का हिस्सा है।