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RBI ने लगातार तीसरी बार नहीं बदला रेपो रेट, GDP को लगेगा बड़ा झटका, महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी

RBI ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है। पहले जहां GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वहीं अब इसे घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है।

RBI repo rate  /GDP growth / inflation
RBI repo rate /GDP growth / inflation - फोटो : news4nation

RBI : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद फिलहाल आम लोगों की लोन की EMI पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और बैंक ऋण की ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी की समीक्षा बैठक के बाद इसकी घोषणा की। 


इससे पहले अप्रैल 2026 की बैठक में भी रेपो रेट को यथावत रखा गया था। केंद्रीय बैंक ने पिछली बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी, जिसके बाद यह 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। रेपो रेट कम होने पर बैंकों के लिए कर्ज सस्ता हो जाता है, जिसका लाभ ग्राहकों को कम ब्याज दर और सस्ती EMI के रूप में मिल सकता है।

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 GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती

RBI ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को घटा दिया है। पहले जहां GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, वहीं अब इसे घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही बाधाएं आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं।


 महंगाई का अनुमान बढ़ाया

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। RBI के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। वही मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख (Policy Stance) "न्यूट्रल" बनाए रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि RBI भविष्य की परिस्थितियों और आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए जरूरत पड़ने पर दरों में बदलाव कर सकता है।

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कमजोर मानसून को लेकर चिंता

RBI ने मानसून को लेकर भी चिंता जताई है। कम बारिश की आशंका कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकती है। हालांकि सरकार की फसल विविधीकरण और कृषि सुधार योजनाओं से इसके प्रभाव को कम करने की उम्मीद जताई गई है।


अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्र मजबूत

केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। इसके अलावा रोजगार की स्थिति स्थिर रहने और GST से जुड़े सुधारों के कारण शहरी क्षेत्रों में उपभोग और मांग को समर्थन मिल रहा है।


उल्लेखनीय है कि RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन सदस्य RBI से और तीन केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति की बैठक हर दो महीने पर आयोजित की जाती है। वित्त वर्ष 2026-27 में MPC की कुल छह बैठकें प्रस्तावित हैं।