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बकरीद पर अब 'ऑनलाइन बुकिंग'! बिहार सहित 4 राज्यों में पहली बार बुक होंगे बकरे, जानें पूरा प्रोसेस

आधुनिकता के इस दौर में अब त्योहारों की खरीदारी का तरीका भी बदल रहा है। इस वर्ष बकरीद के मौके पर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम के बकरी पालकों और खरीदारों के लिए एक सुखद खबर है। पहली बार देश के इन चार राज्यों में एक 'ऐसे संगठित और डिजिटल बकरा बाज

बकरीद पर अब 'ऑनलाइन बुकिंग'! बिहार सहित 4 राज्यों में पहली ब

पटना: आधुनिकता के इस दौर में अब त्योहारों की खरीदारी का तरीका भी बदल रहा है। इस वर्ष बकरीद के मौके पर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम के बकरी पालकों और खरीदारों के लिए एक सुखद खबर है। पहली बार देश के इन चार राज्यों में एक 'ऐसे संगठित और डिजिटल बकरा बाजार' की शुरुआत की जा रही है, जहां खरीदार न केवल शारीरिक रूप से जाकर, बल्कि घर बैठे ऑनलाइन भी अपनी पसंद का बकरा चुन और बुक कर सकते हैं। सरकार के नीतिगत विजन और एसबीआई (SBI) फाउंडेशन के सहयोग से 'द गोट ट्रस्ट' ने इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और त्योहार की खरीदारी को पारदर्शी बनाना है।

पूर्णिया में भी सुविधा 

इस पहल की सबसे बड़ी खासियत इसका 'फिजिटल' (फिजिकल + डिजिटल) मॉडल है। बिहार के पूर्णिया से लेकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बाराबंकी तक कुल 10 प्रमुख केंद्रों पर यह विशेष बाजार 20 से 28 मई 2026 तक संचालित होगा। पारंपरिक मंडियों में अक्सर वजन को लेकर होने वाली अनिश्चितता और बिचौलियों के दखल से खरीदार और किसान दोनों परेशान रहते थे। लेकिन इस नए मॉडल में 'वजन पे विश्वास' के सिद्धांत को अपनाया गया है। यहां बकरों की बिक्री अंदाजे से नहीं, बल्कि डिजिटल कांटे पर तौलकर किलो के भाव से की जाएगी, जिससे खरीदार को उचित बकरा और पशुपालक को उसकी मेहनत का सही दाम मिलना सुनिश्चित होगा।

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द गोट ट्रस्ट की पहल

द गोट ट्रस्ट के संस्थापक संजीव कुमार ने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आम मंडियों में अक्सर वजन का धोखा, बीमार पशु और भाग-दौड़ की भारी परेशानी होती है, जिससे खरीदार को मानसिक और आर्थिक तनाव झेलना पड़ता है। उन्होंने बताया कि हमारा यह विशेष बकरा बाजार ‘वजन पे विश्वास, इंसाफ के साथ’ की गारंटी देता है। सरकार और एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से हम ग्रामीण क्षेत्रों की बकरी पालक दीदियों को सीधे शहरी खरीदारों से जोड़ रहे हैं, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है बल्कि किसानों के स्वाभिमान की भी रक्षा हो रही है।

महिला बकरी पालक खुश

बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी जैसे ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिला बकरी पालकों के लिए यह एक वरदान साबित हो रहा है। बकरी पालक महिलाओं के लिए ये वरदान साबित हो रहा है। जिसके तहत खरीदार वेबसाइट पर जाकर बकरे की तस्वीर, उसका सटीक वजन, उम्र और नस्ल देख सकते हैं। डिजिटल बुकिंग के बाद होम डिलीवरी की सुविधा भी दी जा रही है, जो विशेष रूप से बुजुर्गों और व्यस्त शहरवासियों के लिए बड़ी राहत है। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार के समावेशी विकास के संकल्प को बल मिल रहा है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उन ग्रामीण महिलाओं को जोड़ा गया है जो अब तक बाजार की जानकारी के अभाव में अपने पशुओं को सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर थीं।

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सेहत की सुरक्षा

सुरक्षा और सेहत के लिहाज से भी यह बाजार आम मंडियों से बिल्कुल अलग है। यहां आने वाले हर बकरे का पशु चिकित्सकों द्वारा गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और खरीदार को एक 'हेल्थ सर्टिफिकेट' भी प्रदान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कुर्बानी के लिए केवल पूर्णतः स्वस्थ पशु ही उपलब्ध हों। इसके अलावा, इन केंद्रों पर पशुओं के लिए दवाओं और चारे की उपलब्धता के साथ-साथ 'टेलीवेट' सेवा भी शुरू की गई है, जहां वीडियो कॉल के माध्यम से डॉक्टर से निःशुल्क परामर्श लिया जा सकता है। एसबीआई फाउंडेशन और 'द गोट ट्रस्ट' की यह साझेदारी न केवल वित्तीय समावेशन का उदाहरण पेश कर रही है, बल्कि यह पशु कल्याण और डिजिटल इंडिया के सपने को ग्रामीण स्तर पर साकार कर रही है।