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Fuel Export Tax: पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला, एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव से बढ़ी हलचल

Fuel Export Tax: सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ी, जबकि डीजल और विमान ईंधन पर कम हुई। जानिए नई दरें और इसका आम लोगों पर असर।

Fuel Export Tax

Fuel Export Tax: सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में एक बार फिर बदलाव किया है। नए आदेश के तहत पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है, जबकि डीजल और विमान ईंधन के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी घटाई गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह बदलाव केवल निर्यात यानी विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू है।

नई दरों के मुताबिक अब पेट्रोल के निर्यात पर 4 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी लगेगी, जबकि पहले यह 1.5 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं डीजल के निर्यात पर ड्यूटी 14 रुपये से घटाकर 8.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसी तरह विमान ईंधन यानी ATF पर निर्यात शुल्क 12.5 रुपये से घटाकर 7.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

ड्यूटी किस तरह के तेल कंपनियों पर लागू होती है

यह समझना जरूरी है कि यह ड्यूटी केवल उन तेल कंपनियों पर लागू होती है जो पेट्रोल, डीजल और ATF विदेशों में भेजती हैं। इसका असर भारत के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले पेट्रोल या डीजल की कीमतों पर सीधे तौर पर नहीं होगा। यानी आपकी गाड़ी में भरने वाले तेल के दाम इस फैसले से फिलहाल नहीं बदलेंगे। सरकार ने यह ड्यूटी पहली बार 27 मार्च 2026 को लगाई थी। उस समय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। सरकार का मकसद यह था कि तेल कंपनियां ज्यादा मात्रा में ईंधन विदेश न भेजें और देश के अंदर पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। इससे घरेलू बाजार में किसी तरह की कमी न हो और सप्लाई सामान्य बनी रहे।

 हर 15 दिन में इन ड्यूटी दरों की समीक्षा

सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार के हालात को देखते हुए हर 15 दिन में इन ड्यूटी दरों की समीक्षा करती है। इसी समीक्षा के आधार पर कभी ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो कभी घटाई जाती है। इस बार पेट्रोल पर ड्यूटी बढ़ना और डीजल व ATF पर ड्यूटी घटना अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आए बदलाव को दिखाता है। सरकार ने इसके साथ एक और अहम फैसला लिया है। पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर कुछ देशों को ड्यूटी से छूट दी जाती है। पहले यह छूट नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लिए थी। अब इस सूची में मालदीव और मॉरीशस को भी शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियों को इन देशों में ईंधन निर्यात करने पर विशेष छूट मिलेगी।

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 1 जुलाई 2026 से लागू हो गया नियम

यह बदलाव 30 जून 2026 को जारी अधिसूचनाओं के जरिए घोषित किया गया और 1 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। कुल मिलाकर सरकार का यह कदम घरेलू ईंधन सप्लाई को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।