LATEST NEWS

  • Tej Pratap Yadav Death Threat
  • तेजप्रताप यादव को दोपहर 3:11 बजे आया खौफनाक कॉल! वीडियो वायरल करने की धमकी से मचा हड़कंप, सरकार

  • Bihar News : मोकामा नगर परिषद कर्मचारी पर महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप, कहा अश्लील फोटो वायरल करने की दी धमकी
  • Bihar News : मोकामा नगर परिषद कर्मचारी पर महिला ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप, कहा अश्लील फोटो वायरल

  • Fatuha Patna Liquor Raid
  • कानपुर से पटना पहुंची सवा करोड़ की शराब! खाद की बोरियों के नीचे छिपाकर लाई गई,उत्पाद विभाग का

  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने दहेज़ प्रताड़ना के आरोपी पति अमरजीत कुमार को दी जमानत, 7 महीने से जेल में था बंद
  • Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने दहेज़ प्रताड़ना के आरोपी पति अमरजीत कुमार को दी जमानत, 7 महीने

  • Bihar News : गया में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रक पर लोड विदेशी शराब की बड़ी खेप किया बरामद, चालक को किया गिरफ्तार
  • Bihar News : गया में उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, ट्रक पर लोड विदेशी शराब की बड़ी खेप

Success Story: बकरी पालन से हो रहा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण, लाखों परिवारों का बदला भाग्य

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन हमेशा से एक मजबूत आधार रहा है, लेकिन बकरी पालन जैसे क्षेत्र लंबे समय तक उपेक्षित रहे। इसी शून्यता को भरने और हाशिए पर खड़े परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए साल 2008 में 'द गो’ट ट्रस्ट' (TGT) की स्थापना

Success Story: बकरी पालन से हो रहा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प

लखनऊ/पटना: भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन हमेशा से एक मजबूत आधार रहा है, लेकिन बकरी पालन जैसे क्षेत्र लंबे समय तक उपेक्षित रहे। इसी शून्यता को भरने और हाशिए पर खड़े परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए साल 2008 में 'द गो’ट ट्रस्ट' (TGT) की स्थापना हुई। आज ये सिर्फ एक संस्था नहीं रह गई है, बल्कि भारत का पहला परिपक्व 'हाइब्रिड सामाजिक उद्यम' बन चुकी है। इस मॉडल ने छोटे पशुधन को केवल गुजर-बसर का साधन मानने के बजाय एक लाभकारी व्यवसाय (Enterprise) में तब्दील कर दिया है। भारत में लगभग 3 करोड़ से अधिक परिवार बकरी पालन से जुड़े हैं, जिनमें अधिकांश भूमिहीन किसान, महिलाएं और कम शिक्षित वर्ग शामिल हैं। द गो’ट ट्रस्ट ने इस पूरे 'इनफॉर्मल' सेक्टर को संगठित करने के लिए 'वैल्यू चेन' आधारित सोच विकसित की, जिसने नस्ल सुधार से लेकर बाजार तक की पूरी श्रृंखला को एक सूत्र में पिरो दिया है। 

सक्सेस स्टोरी बनीं 'पशु सखी'

इस क्रांतिकारी बदलाव की सबसे मजबूत कड़ी 'पशु सखी' मॉडल है। द गो’ट ट्रस्ट ने ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें पशु स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में तैयार किया। ये पशु सखियाँ अब गांवों में कृत्रिम गर्भाधान (AI), टीकाकरण और गर्भ जांच जैसी तकनीकी सेवाएं दे रही हैं, जिससे न केवल पशुओं की मृत्यु दर कम हुई है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। तकनीक के लोकतंत्रीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए संस्था ने 'डिजिटल लाइवस्टॉक फार्मर स्कूल' (DLFS) की शुरुआत की है। इसके माध्यम से स्थानीय भाषाओं में मोबाइल आधारित लर्निंग और वीडियो के जरिए आखिरी मील तक ज्ञान पहुँचाया जा रहा है। बाजार की विसंगतियों को दूर करने के लिए 'लाइवस्टॉक ट्रेडिंग सेंटर्स' स्थापित किए गए हैं, जहाँ बिचौलियों के अंदाजे के बजाय बकरियों को वजन के हिसाब से बेचा जाता है। इस पारदर्शिता ने किसानों की आय में 30 से 60 प्रतिशत तक का इजाफा किया है। 

Diarch GO

बकरी पालन ने बदला भाग्य

द गो’ट ट्रस्ट की सफलता के पीछे एक संतुलित 'हाइब्रिड मॉडल' काम कर रहा है। इसमें एक हिस्सा नॉन-प्रॉफिट (ट्रस्ट) है जो प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का कार्य करता है, जबकि दूसरा फॉर-प्रॉफिट हिस्सा बाजार संचालन, ब्रांडिंग और प्रोसेसिंग पर ध्यान केंद्रित करता है। इससे ग्रांट पर निर्भरता कम हुई है और स्थिरता आई है। संस्था ने केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि सशक्त संस्थाओं का निर्माण किया है, जिसमें सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) और फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) शामिल हैं। बकरी के दूध के पोषक उत्पादों से लेकर ऑर्गेनिक खाद तक के विविधीकरण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वैल्यू एडिशन की कमी को दूर किया है। 

सरकार के साथ साझेदारी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरा अभियान सरकार के सक्रिय सहयोग और साझेदारी से चल रहा है। द गो’ट ट्रस्ट का यह सफल मॉडल अब एनआरएलएम (NRLM) जैसे प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा बन चुका है। नाबार्ड (NABARD) और विभिन्न सीएसआर फंड्स के सहयोग से इसे देश के विभिन्न राज्यों में लागू किया जा रहा है। सरकार के समर्थन ने इस मॉडल को बड़े पैमाने पर विस्तार (Scale) देने में मदद की है। वर्तमान में यह 'प्रो-पुअर लाइवस्टॉक मॉडल' एक वैश्विक बेंचमार्क बन चुका है, जिसका अध्ययन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी किया जा रहा है। 

NSIT
Nsmch

कई चुनौतियां सामने

हालांकि, जलवायु परिवर्तन और चारे की उपलब्धता जैसी चुनौतियां आज भी सामने हैं, लेकिन द गो’ट ट्रस्ट का भविष्य का रोडमैप एआई (AI) और डेटा आधारित पशुपालन पर केंद्रित है। संस्था का मानना है कि गरीब को 'बेनिफिशियरी' (लाभार्थी) के बजाय 'एंटरप्रेन्योर' (उद्यमी) बनाना ही असली सशक्तिकरण है। यह मॉडल आत्मनिर्भर भारत के उस सपने को साकार कर रहा है, जहाँ विकास की शुरुआत सबसे नीचे के पायदान से होती है। बकरी पालन को एक नई पहचान दिलाकर इस संस्था ने यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक सरल हो और बाजार तक पहुंच सीधी हो, तो ग्रामीण भारत अपनी किस्मत खुद लिख सकता है। यह केवल एक व्यापारिक मॉडल नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का एक नया दर्शन है।