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पहली बार रविवार को पेश होगा केंद्रीय बजट..क्या पश्चिम बंगाल चुनाव की दिखेगी झलक

पहली बार रविवार को पेश होगा केंद्रीय बजट..क्या पश्चिम बंगाल
पहली बार रविवार को पेश होगा केंद्रीय बजट- फोटो : news4nation

संसदीय इतिहास में पहली बार रविवार को पेश होगा बजट....


2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर में भारी छूट दी थी… जनता इस बार सरकार से टैक्स कटौती की उम्मीद लगा रही है…बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा जो 2 अप्रैल तक चलेगा.. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस वर्ष रविवार एक फरवरी को बजट पेश करेंगी.. आंकड़ों के हिसाब से इस समय देश की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी स्थिति है.. जीएसटी कर संग्रह लगातार ऊंचा बना हुआ है.. लगभग सभी वित्तीय एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि इस वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत से लेकर 7.4 प्रतिशत के बीच रह सकती है..लिहाजा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वर्ष केंद्रीय वित्त मंत्री बजट में ऐसे उपाय करेगी जिससे व्यापार में वृद्धि दर बनी रहे.. 

लेकिन आम आदमी के लिहाज से बड़ा सवाल है कि क्या आयकर दाताओं को एक बार फिर कोई बड़ी छूट मिल सकती है?

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2025-26 के बजट में केंद्र सरकार ने आयकर में भारी छूट दी थी... केंद्र सरकार ने बुनियादी छूट की सीमा चार लाख रूपये तक बढ़ा दी थी...सेक्शन 87ए के अंतर्गत 12 लाख रूपये तक की टैक्स योग्य आय की छूट सीमा 60 हजार रुपये तक बढ़ा दी गई है.. इसका अर्थ है कि प्रतिवर्ष 12 लाख रूपये तक की कमाई करने वाले लोग विभिन्न योजनाओं में निवेश कर पूरी छूट प्राप्त कर लेते है... और व्यावहारिक तौर पर उन्हें कोई कर नहीं देना होता.. नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रूपये कर दी गई थी..


जीएसटी दरों में राहत को केंद्र सरकार का बड़ा सुधारवादी कदम माना... अब सिन गुड्स की कैटेगरी में 40 प्रतिशत के दायरे में आने वाली पान मसाला, सिगरेट और शराब जैसी वस्तुओं को छोड़ दें तो आम आदमी के उपयोग में आने वाली 95 फीसदी वस्तुएं शून्य या पांच प्रतिशत जीएसटी दायरे में आ गई हैं.. हकीकत है कि 18 फीसदी के दायरे में बहुत कम वस्तुएं हैं... उत्पाद सस्ते हुए हैं ..इससे आम आदमी को अपने उपयोग की सामग्री खरीद सकने की क्षमता बढ़ी है..इस कदम को अर्थव्यवस्था को तेज करने वाला माना गया था.. अनुमान था कि कर बचत से लोग बचत राशि को खाने-पीने, घूमने और आवश्यक वस्तुओं की खरीद में निवेश करेंगे.. फिलहाल, आंकड़ों की बात करें तो ट्रंप के टैरिफ वॉर के बाद भी जिस तरह भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी दिखाई दे रही है, उससे लगता है कि दांव बेहद सटीक रहा है..

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क्या और मिलेगी कर छूट?
 सरकार ने जितना कर छूट दिया है, इसे फिलहाल बढ़ाने की संभावना बहुत कम है..लेकिन एक करोड़ रुपये वार्षिक कमाने वाले आय वर्ग यानी सुपर रिच लोगों पर टैक्स दरें बढ़ाई जा सकती हैं..    
 
 किसानों को मिल सकती है और छूट
 कृषि क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में योगदान जाहे जो भी हो, ये कड़वा सच है कि भारत की सबसे बड़ी आबादी अभ भी कृषि पर ही निर्भर है...हालांकि मौसम की अनिश्चितता के बावजूद वैज्ञानिक प्रगति के भरोसे कृषि कार्य मजबूत तरीके से आगे बढ़ रहा है.. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है... लेकिन भारतीय कृषि के बड़े आकार को देखते हुए इसे अभी भी कम माना जाता है.. केंद्र सरकार किसानों को नए कृषि उपकरण खरीदने, खाद-बीज की खरीद पर और नए प्रसंस्करण इकाइयों को लगाने पर छूट का दायरा बढ़ा सकती है..

दिसंबर 2025 में 1.75 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी कर संग्रह हुआ है.. अब लगभग हर महीने जीएसटी कर संग्रह डेढ़ लाख रूपये से अधिक रह रहा है.. पूर्व में यह दो लाख रूपये एक माह की सीमा को भी पार कर चुका है..
 
 ई-कॉमर्स के सामने खुदरा व्यापारियों की हो रक्षा
 व्यापारी व्यापार को सुगम बनाने के लिएसिंगल विंडो कंप्लायंस सिस्टम, अनावश्यक नोटिसऔरनिरीक्षण पर रोकचाहते हैं.. वन नेशन, वन लाइसेंस, वन रजिस्ट्रेशनकी व्यवस्था लागू कर व्यापारियों को अनावश्यक देरी से बचाया जा सकता है। डिजिटल इकोनॉमी से देश के खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है.. केंद्र सरकार को खुदरा व्यापारियों का संरक्षण करना चाहिए जो देश के 11 करोड़ से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार उपलब्ध कराता है..