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वैशाली में गंगा का कहर : महनार के रिहायशी इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी, जलकैदी बने लोग

गंगा नदी के रौद्र रूप से वैशाली जिले के महनार में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। निचले इलाकों को डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब तेजी से ऊपरी क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर रहा है।

वैशाली  में गंगा का कहर : महनार के रिहायशी इलाकों में घुसा ब
वैशाली में गंगा का कहर- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali : गंगा नदी के रौद्र रूप से वैशाली जिले के महनार में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। निचले इलाकों को डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब तेजी से ऊपरी क्षेत्रों और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर रहा है। महनार नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 9 समेत कई अन्य वार्ड पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। जलभराव के कारण स्थानीय लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं और उनका संपर्क मुख्य रास्तों से कट गया है।

प्रशासन के खिलाफ बढ़ता आक्रोश, चक्का जाम की चेतावनी 

बाढ़ के पानी के बीच घिरे लोगों में सरकारी मदद न मिलने से भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बुनियादी सुविधाओं और राहत सामग्री के अभाव से परेशान बाढ़ पीड़ितों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीड़ितों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि उन्हें तुरंत सरकारी सहायता और राहत सामग्री मुहैया नहीं कराई गई, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करने के लिए विवश होंगे।

लापरवाही का आरोप, बांध न बनने से बिगड़े हालात 

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा बांध का निर्माण करा दिया गया होता, तो आज यह भयावह स्थिति पैदा नहीं होती। आपदा का जिम्मेदार वैशाली डीएम और जिला प्रशासन की लापरवाही को ठहराते हुए लोगों ने आरोप लगाया कि समय पर कदम न उठाए जाने के कारण पूरे इलाके को जलप्रलय का सामना करना पड़ रहा है।

छह प्रखंडों में तबाही, लाखों की आबादी प्रभावित 

वैशाली जिले में गंगा और गंडक नदी के उफान से कुल छह प्रखंड जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित राघोपुर और महनार प्रखंड के इलाके हैं। इन दोनों क्षेत्रों में बाढ़ के पानी से लाखों की आबादी बेहाल है और लोगों के सामने भोजन, पीने के पानी और पशुओं के चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

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तत्काल राहत और सरकारी मदद की गुहार 

स्थिति को बेकाबू होता देख बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन से तुरंत नावों की व्यवस्था करने, राहत शिविर लगाने और सूखे राशन का वितरण शुरू करने की मांग की है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोगों में लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है, और यदि जल्द ही जमीनी स्तर पर राहत कार्य शुरू नहीं हुए तो स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है।

रिषभ की रिपोर्ट