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सुपौल का बढ़ा मान: मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा के विचार लोकसभा सचिवालय की पुस्तक में शामिल

सुपौल का बढ़ा मान: मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा के विचार लोकसभा
राघवेंद्र झा के सुझावों को मिली वैश्विक पहचान- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : सुपौल नगर परिषद के मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर उनके प्रभावी विचारों और सुझावों को लोकसभा सचिवालय, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित एक प्रतिष्ठित पुस्तक में स्थान दिया गया है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत नेतृत्व की परिचायक है, बल्कि पूरे सुपौल नगर परिषद और जिले के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बन गई है। इस सम्मान के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।


राष्ट्रीय सम्मेलन में साझा किए थे अनुभव

जानकारी के अनुसार, राघवेंद्र झा ने जुलाई माह में हरियाणा के मानेसर (गुरुग्राम) में आयोजित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया था। इस सम्मेलन में देशभर के नगर निकायों के प्रतिनिधियों के बीच उन्होंने शहरी विकास और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। इसी दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर अपने जमीनी अनुभव और क्रांतिकारी सुझाव साझा किए थे, जिसकी गंभीरता और प्रासंगिकता को देखते हुए लोकसभा सचिवालय ने इसे अपनी आधिकारिक पुस्तक का हिस्सा बनाया है।


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बिहार के 'महिला आरक्षणमॉडल की चर्चा

अपनी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राघवेंद्र झा ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर बिहार के उस ऐतिहासिक निर्णय को प्रमुखता से रखा, जिसमें स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि बिहार का यह मॉडल देशभर के लिए एक मिसाल है, जिसने महिलाओं को न केवल राजनीतिक मंच दिया बल्कि उन्हें निर्णायक भूमिका में भी खड़ा किया है। उनके अनुसार, महिला प्रतिनिधियों की सक्रियता से शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे क्षेत्रों में धरातल पर सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।


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सशक्तिकरण के लिए प्रशिक्षण पर जोर

लोकसभा की पुस्तक में शामिल अपने विचारों में राघवेंद्र झा ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला सशक्तिकरण केवल आरक्षण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि महिला जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रशिक्षण, संसाधन और निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। जब महिलाएं अपने संवेदनशील दृष्टिकोण और जिम्मेदारी के साथ नेतृत्व करती हैं, तो समाज के विकास की गति स्वतः ही तीव्र हो जाती है। उनका मानना है कि छोटे शहरों और कस्बों की आवाज का राष्ट्रीय स्तर पर सुना जाना लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।


जिले में जश्न और प्रेरणा का माहौल

इस राष्ट्रीय मान्यता के बाद सुपौल में उत्सव जैसा माहौल है। नगर परिषद के पार्षदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने मुख्य पार्षद को बधाई देते हुए इसे जिले की पहचान के लिए एक मील का पत्थर बताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सम्मान अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा कि वे ईमानदारी और दूरदृष्टि के साथ काम करें ताकि उनकी गूंज भी राष्ट्रीय फलक तक पहुंचे। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि विचार मौलिक और कार्य के प्रति समर्पण हो, तो स्थानीय स्तर की आवाज को भी देश का सर्वोच्च सदन सम्मान देता है।


विनय कुमार मिश्रा का रिपोर्ट