सुपौल के ऐतिहासिक राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी में 4 सितंबर को मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

Supaul : शहर के हृदयस्थल स्थित ऐतिहासिक श्री राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी में आगामी 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (जन्माष्टमी) अपार श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। आयोजन को लेकर मंदिर संचालन समिति की ओर से तैयारियां तेजी से शुरू कर दी गई हैं। ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं और शहरवासियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
सैकड़ों वर्ष पुराना है ठाकुरबाड़ी का गौरवशाली इतिहास
श्री राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। पूर्वजों और दानदाताओं द्वारा यहां श्री राधा-कृष्ण व शिव मंदिर सहित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिरों का निर्माण कराया गया था। इसके साथ ही परिसर के समीप श्रद्धालुओं के लिए शिवगंगा पोखर और दूर-दराज से आने वाले राहगीरों के लिए आश्रय स्थल भी बनाया गया था, जिसका विकास समय के साथ स्थानीय समाज के सहयोग से निरंतर होता रहा।
खाटू श्याम दरबार और आठ देवी-देवताओं के प्रकोष्ठ बने आकर्षण का केंद्र
वर्तमान में ठाकुरबाड़ी परिसर में आठ देवी-देवताओं के भव्य प्रकोष्ठ स्थापित हैं। लगभग पांच वर्ष पूर्व यहां श्री खाटू श्याम बाबा का सुंदर दरबार भी स्थापित किया गया था। मंदिर का शांत और आध्यात्मिक वातावरण न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि बाहर से आने वाले अतिथियों और श्रद्धालुओं को भी विशेष रूप से आकर्षित करता है। यहां झूलनोत्सव, बसंत महोत्सव और जन्माष्टमी मुख्य आयोजनों में शामिल हैं।
हाल ही में कराया गया मंदिर का रिनोवेशन, झूलनोत्सव रहा भव्य
संचालन समिति के विशेष प्रयासों से हाल ही में मंदिर प्रांगण का व्यापक रिनोवेशन (जीर्णोद्धार) कार्य संपन्न कराया गया है। रिनोवेशन के बाद हाल ही में आयोजित झूलनोत्सव 2026 को बेहद भव्य रूप दिया गया, जिसमें फूलों की मनमोहक सजावट, भक्ति जागरण और आकर्षक झांकियों के साथ बेहतर विधि-व्यवस्था ने लोगों का मन मोह लिया।
जन्माष्टमी को ऐतिहासिक बनाने में जुटी संचालन समिति
झूलनोत्सव के सफल समापन के बाद अब संचालन समिति 4 सितंबर को आयोजित होने वाले श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को और अधिक भव्य व यादगार बनाने में जुट गई है। मीडिया प्रभारी पवन कुमार अग्रवाल ने बताया कि समिति के सभी सदस्य तैयारियों में लगे हुए हैं और इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के बीच भक्ति, आस्था और धार्मिक चेतना को और मजबूत करना है।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट















