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सीवान में किसने चलाई गोली? 3 छात्र जख्मी, पुलिस बोली– जांच जारी, तेजस्वी ने लगाए बड़े आरोप,कहा AK- 47से पुलिस ने मारी गोली, आख़िर किसकी गोली से लहूलुहान हुए छात्र?पढ़िए

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहले तीखी झड़प हुई, फिर ईंट-पत्थर चले, आंसू गैस के गोले दागे गए और आखिरकार गोलियां चलने की खबर ने पूरे सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया।

Siwan Clash Sparks Firing Row Probe On as Political Heat Ris
आख़िर किसकी गोली से लहूलुहान हुए छात्र?- फोटो : social Media

Bihar Police Firing: बिहार बंद के दौरान सीवान की सड़कों पर जो मंजर सामने आया, उसने कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और सियासत तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया। नीट पेपर लीक के विरोध में बुलाए गए बंद ने देखते ही देखते हिंसक शक्ल अख्तियार कर ली। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहले तीखी झड़प हुई, फिर ईंट-पत्थर चले, आंसू गैस के गोले दागे गए और आखिरकार गोलियां चलने की खबर ने पूरे सूबे की सियासत में भूचाल ला दिया।

पुलिस का दावा है कि हालात उस वक्त बेकाबू हुए जब कुछ उपद्रवी तत्वों ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का यह भी कहना है कि सबसे पहले फायरिंग उपद्रवी तत्वों की ओर से हुई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। इस पूरे घटनाक्रम में तीन युवा प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि सीवान के एसपी पूरन कुमार झा, दो डीएसपी समेत करीब 25 पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए।

घायलों में सीवान के आरिफ, बुलेट कुमार गोंड और उत्तर प्रदेश के रायबरेली निवासी आकाश कुमार शामिल हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया। दूसरी ओर, पुलिस ने उपद्रव और हिंसा के आरोप में 65 लोगों को हिरासत में लिया है और पूरे इलाके में छापेमारी का सिलसिला जारी है।

इस बीच मामला पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पुलिस ने छात्रों पर एके-47 से गोलियां चलाईं। आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी आरोप लगाया कि आंसू गैस के बाद छात्रों की भीड़ पर दस से अधिक राउंड फायरिंग की गई। दूसरी तरफ पुलिस इन आरोपों से इत्तफाक नहीं रखती। एसपी पूरन कुमार झा का कहना है कि तीनों युवक किसकी गोली से घायल हुए, यह अभी स्पष्ट नहीं है और इसकी जांच कराई जा रही है।

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यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि पुलिस का कहना है कि अभी यह तय नहीं हुआ कि गोली किसकी थी, तो विपक्ष का यह दावा किस आधार पर है कि पुलिस ने असॉल्ट राइफल से फायरिंग की? वहीं यदि जांच में यह साबित होता है कि पुलिस ने वास्तव में ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया, तो यह भी स्पष्ट करना होगा कि ऐसी कार्रवाई किन परिस्थितियों में आवश्यक समझी गई। दूसरी ओर, यदि गोली किसी अन्य स्रोत से चली, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी है।

फिलहाल यह निर्विवाद है कि हिंसा में प्रदर्शनकारी और पुलिस दोनों पक्ष के लोग घायल हुए हैं। घटना की वास्तविक तस्वीर सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच और उसके आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार करना होगा।