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सूखी नदी कोहिरा की प्यास बुझाने के लिए इस नदी से जोड़ने की तैयारी, 155 करोड़ की आएगी लागत

जल संसाधन विभाग ने 155 करोड़ रुपये की लागत से कोहिरा नदी को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया है। सोन नदी के पानी से कोहिरा को जोड़ा जाएगा, जिससे 7800 हेक्टेयर में सिंचाई होगी।

सूखी नदी कोहिरा की प्यास बुझाने के लिए इस नदी से जोड़ने की त

Dehri - दक्षिण बिहार के रोहतास और कैमूर जिलों के लिए जल संरक्षण और सिंचाई के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी खबर है। कभी क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली कोहिरा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए जल संसाधन विभाग ने 'सोन-कोहिरा लिंक योजना' पर काम तेज कर दिया है। 155 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य दम तोड़ती नदी में फिर से प्राण फूंकना और हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचित करना है। 

सोन नदी के पानी से कलकल बहेगी कोहिरा

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता सोन नदी का कोहिरा से जुड़ाव है। योजना के तहत इंद्रपुरी बैराज से निकलने वाली नहर के माध्यम से सोन नदी के अतिरिक्त जल को कोहिरा नदी तक पहुँचाया जाएगा। इसके लिए 12.62 किलोमीटर पुरानी नहर का जीर्णोद्धार (Restoration) किया जा रहा है और 500 मीटर नई नहर का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके अलावा, राजपुर बीयर की मरम्मत कर जल प्रवाह को नियंत्रित और सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे नदी सालभर पानी से लबालब रह सकेगी। 

16 महीनों में पूरा होगा लक्ष्य: जून 2027 तक बढ़ेगा जलस्तर

जल संसाधन विभाग ने इस कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए 16 महीने की समय सीमा तय की है। लक्ष्य रखा गया है कि अगले वर्ष जून तक योजना का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए। 64 किलोमीटर लंबी कोहिरा नदी, जो वर्तमान में जल प्रवाह रुकने के कारण कई जगहों पर छोटे तालाबों में सिमट गई थी, इस परियोजना के पूर्ण होते ही अपने पुराने स्वरूप में लौट आएगी। 1962 में बने जलाशय को भी इस योजना से नया जीवन मिलेगा। 

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किसानों की बदलेगी किस्मत, 7800 हेक्टेयर में होगी सिंचाई

इस योजना का सीधा और सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिलेगा। आंकड़ों के अनुसार, कुल 7876 हेक्टेयर क्षेत्र इस परियोजना से लाभान्वित होगा। इसमें खरीफ फसलों के लिए 5095 हेक्टेयर और रबी फसलों के लिए 4725 हेक्टेयर भूमि को पर्याप्त पानी मिल सकेगा। सिंचाई की बेहतर सुविधा होने से न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि उत्पादकता में भी रिकॉर्ड वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। 

पर्यावरण और भूजल स्तर के लिए वरदान

नदी के पुनर्जीवित होने से केवल खेती ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी मजबूती मिलेगी। नदी में निरंतर जल प्रवाह रहने से रोहतास और कैमूर जिलों के भूजल स्तर (Groundwater Level) में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे गर्मियों में होने वाले पेयजल संकट से निजात मिलेगी। यह परियोजना जल संरक्षण की दिशा में बिहार सरकार का एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।