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Bihar Crime: इलाज नहीं, साज़िश का अड्डा बना सदर अस्पताल! खून से लथपथ ज़ख्मी को जबरन किया डिस्चार्ज, परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया गंभीर आरोप

Bihar Crime:सदर अस्पताल से एक सनसनीखेज़ और शर्मनाक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रगों में दौड़ रही बदइंतज़ामी और बेपरवाही को बेनकाब कर दिया है।

Bihar Crime: इलाज नहीं, साज़िश का अड्डा बना सदर अस्पताल! खून
मरीज का जबरन डिस्चार्ज - फोटो : SOCIAL MEDIA

Saharsa: सदर अस्पताल से एक सनसनीखेज़ और शर्मनाक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रगों में दौड़ रही बदइंतज़ामी और बेपरवाही को बेनकाब कर दिया है। मारपीट में बुरी तरह ज़ख्मी एक मरीज को कथित तौर पर साज़िशन और जबरन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिए जाने का इल्ज़ाम लगा है, जिससे अस्पताल प्रशासन कटघरे में खड़ा हो गया है।

पीड़ित की पहचान माहेश्वरी साह, निवासी ग्राम ढोली, वार्ड नंबर-5 के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि माहेश्वरी साह बीते पांच दिनों से सदर अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। सिर पर गंभीर ज़ख्म, कई टांके और लगातार बहता खून उसकी हालत की गवाही दे रहे हैं। परिजनों का कहना है कि मरीज की हालत अब भी नाज़ुक है। जब भी वह बोलने की कोशिश करता है, सिर से खून रिसने लगता है, जिससे घरवाले दहशत में हैं।

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परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर मरीज को जबरन डिस्चार्ज किया गया। उनका दावा है कि वे लगातार मरीज को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। उल्टे, बिना पूरी तरह स्वस्थ किए मरीज को रिलीज़ कर दिया गया, जो सीधे तौर पर मरीज की जान से खिलवाड़ है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पीड़ित परिवार इंसाफ की आस में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक के दरवाज़े पर पहुंचा। आरोप है कि पहले उन्हें टरकाया गया, शिकायत को हल्के में लिया गया। लेकिन जब मीडिया ने इस मामले को उछाला और तीखे सवाल दागे, तब जाकर उपाधीक्षक हरकत में आए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि कल मेडिकल बोर्ड बैठाकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। फिलहाल यह पूरा प्रकरण सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान बनकर खड़ा है। क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी गहरी साज़िश का हिस्सा? अब सबकी निगाहें अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं, कि दोषियों पर गाज गिरती है या मामला फाइलों में ही दफन हो जाता है।

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रिपोर्ट- छोटू सरकार