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सहरसा में कर्ज में डूबे किसान ने की आत्महत्या, फाइनेंस एजेंट की बदसलूकी बनी वजह

बिहार के सहरसा जिले के सलखुआ थाना क्षेत्र में लोन की किस्त न चुका पाने और फाइनेंस कंपनी के एजेंट द्वारा अपमानित किए जाने के बाद किसान ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पूरी खबर पढ़ें।

 सहरसा में कर्ज में डूबे किसान ने की आत्महत्या, फाइनेंस एजें
farmer suicide- फोटो : freepik

Bihar News saharsa farmer Suicide: बिहार के सहरसा जिले के सलखुआ थाना क्षेत्र के गोरदह पंचायत में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक गरीब किसान ने कर्ज की किस्त समय पर न चुका पाने और फाइनेंस एजेंट की बदसलूकी से आहत होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।

मृतक किसान की पहचान गोरदह पंचायत के मुसहरणीया वार्ड-दो निवासी देवानंद पासवान (55) के रूप में हुई है। उन्होंने अपनी पत्नी विभा देवी के नाम से एक निजी फाइनेंस कंपनी से ₹75,000 का लोन लिया था।हर महीने ₹4,200 की किस्त चुकानी थी, लेकिन मार्च की किस्त भरने में असमर्थ थे।जब किसान ने आधी राशि देने की बात कही, तो फाइनेंस एजेंट ने गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार किया।मानसिक तनाव में आकर किसान ने जहर खा लिया और अस्पताल में दम तोड़ दिया।

मृतक किसान की पत्नी और गांववालों का बयान

पत्नी विभा देवी ने बताया कि फाइनेंस एजेंट ने कहा कि मर जाओ, लेकिन किस्त चाहिए! इस अपमान को देवानंद जी सहन नहीं कर पाए और जहर खा लिया। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांववालों का कहना है कि देवानंद पासवान एक छोटे किसान थे, जिनके पास केवल 3-4 कट्ठा जमीन थी।किसान के परिवार में 6 बच्चे हैं—तीन बेटे और तीन बेटियां।एक बेटी की शादी हो चुकी थी, जबकि दो की शादी बाकी थी।वे स्वच्छता अभियान के तहत गांव में झाड़ू लगाने का भी काम करते थे।

पुलिस की प्रतिक्रिया

सलखुआ थाना अध्यक्ष विशाल कुमार ने कहा कि हमें अब तक कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। परिजनों से लिखित शिकायत मिलने के बाद उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" इसके अलावा सदर थाना अध्यक्ष सुबोध कुमार ने कहा कि पोस्टमार्टम कराया गया है और परिजनों ने कर्ज के दबाव में आत्महत्या की बात कही है। फाइनेंस एजेंट पर लगे आरोपों की जांच की जा रही है।

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फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

गांववालों का कहना है कि फाइनेंस कंपनियों के एजेंट गरीब किसानों और छोटे कर्जदारों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हैं। ग्रामीणों और परिजनों ने दोषी फाइनेंस एजेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बिहार में बढ़ रही किसानों की आत्महत्या—क्यों?

बिहार में किसानों की आत्महत्या के पीछे कई कारण हैं:

फसल खराब होने से आर्थिक तंगी।

 बैंकों और फाइनेंस कंपनियों की लोन वसूली में कठोर नीतियां।

बढ़ती महंगाई और गिरती कृषि आय।

सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर सही कार्यान्वयन न होना।